शाहजहांपुर : प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी पड़ गई भारी, अपनो को खोया

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Edited By Pradeep Kumar
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महाकुंभ मेले से सकुशल लौटे श्रद्धालु विनोद शुक्ला ने सुनाई दास्तां

शाहजहांपुर, अमृत विचार। प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या को हुई घटना के दौरान संगम में स्नान कर सकुशल घर लौटे विनोद शुक्ला और उनके साथी के घर वाले ईश्वर को बार-बार धन्यवाद देते नहीं थक रहे हैं। दोनों के परिवार वालों की अपनो को सकुशल देख कर खुशी से आंखे भर आईं। महाकुंभ मेले से सकुशल लौटे श्रद्धालु विनोद शुक्ला ने जो सुनाई दास्तां सुनाई उसमें प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी ही श्रद्धालुओं पर भारी पड़ गई, जिस वजह से उन्हें अपनो को खोना पड़ गया।

पुवायां कस्बा के मोहल्ला कसभरा तकिया निवासी शिक्षक विनोद शुक्ला अपने साथी सतवां बुजुर्ग निवासी उमाशंकर मिश्रा के साथ प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में संगम तट पर मौनी अमावस्या को स्नान करने के लिए एक दिन पहले प्रयागराज के लिए रवाना हुए थे। रात करीब 12 बजे प्रयागराज मेला में दाखिल हुए जहां सबसे पहले रुकने का स्थान देखा, जहां कुछ देर आराम किया, चूंकि श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी, इसलिए ज्यादा देर तक आराम करने के बजाय रात में ही स्नान करने का विचार बनाया और स्नान करने के लिए संगम घाट की तरफ चल दिए लेकिन उस तरफ भीड़ अधिक होने के कारण और अधिकारियों द्वारा लगातार चेतावनी दिए जाने की वजह से हम लोग एक किलोमीटर दूर दूसरे घाट पर ही रुक गए, जिस स्थान पर हम स्नान करने के लिए रुके थे, उस स्थान पर भीड़ थी, इसलिए जल्दी-जल्दी स्नान कर वहां से निकले तब तब रात के दो बज चुके थे। इसी दौरान पुवायां में रहने वाले परिचितों ने टीवी पर महाकुंभ में हुई भगदड़ का हाल जानने के लिए मोबाइल पर कॉल कर दी। विनोद ने बताया कि तब तक उन्हें मेला में रहते हुए कुछ भी जानकारी नहीं थी क्योंकि इस घटना के बाद प्रशासन ने जो व्यवस्था संभाली, उससे घटना की खबर पूरे मेला परिसर में फैलने से बच गई, इसलिए जो श्रद्धालु संगम घाट पर सोए हुए थे और उसके आसपास थे, वहीं इस घटना के शिकार हुए, लेकिन प्रशासन की सजगता ने स्थिति को कंट्रोल कर लिया। सोशल मीडिया के जरिये हालात बिगड़ने की संभावना को देखते हुए इंटरनेट सेवा को भी प्रभावित कर दिया गया, क्योंकि मोबाइल पर बात करते समय सिग्नल बार-बार टूट रहे थे, इस वजह से स्पष्ट रूप से बात नहीं हो पा रही थी। करीब एक से दो घंटे बाद जब प्रशासन ने स्थित को पूरी तरह से कंट्रोल कर लिया, तब फिर से स्नान शुरू किया गया। विनोद शुक्ला ने बताया कि बार-बार प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज कर देना खुद श्रद्धालुओं पर भारी पड़ गया, इस घटना में जिन लोगों ने अपनो को खोया उनके लिए हर किसी के दिल में दर्द है। लेकिन महाकुंभ जैसे महापर्व पर इस घटना के बाद सीख लेने की जरूरत है कि धर्म स्थल पर प्रशासन के निर्देशों को अनदेखा न करें, धार्मिक यात्रा पर जिस मनोकामना से हंसी-खुशी के साथ अपनों के साथ गए थे, वैसे ही सुरक्षित घर लौटें।

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