डाइविंग ने दिया गिरकर फिर से खड़े होने का हौसला, आज चैंपियन बनी पलक

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार: ट्रेनिंग के शुरुआती दौर में डाइविंग बोर्ड में कई बार गिरी लेकिन कोच ने फिर से खड़े होने के लिए प्रेरित किया। 1 मी. स्प्रिंग बोर्ड डाइविंग में गोल्ड जीतने वाली पलक ने आठ साल की उम्र से डाइविंग शुरू कर दी थी। गोल्ड जीतने के बाद पलक ने बताया कि डाइविंग के दौरान शुरुआती दौर में कई बार वह बोर्ड में गिर जाती थी लेकिन कोच सख्त लहजे में फिर से डाइव करने के लिए बोलते तो फिर से डर के मारे डाइव मारती थी।

आज जब डाइविंग को कॅरियर चुन लिया तो यही सीख मिली कि जिंदगी में कई बार हम गिरेंगे लेकिन हमारे हौसले हमें फिर से खड़ा कर एक मुकाम तक ले जाएंगे। मध्य प्रदेश की पलक शर्मा ने बताया कि उनकी चचेरी बहन स्विमिंग करती थी, जिसे देखकर उन्होंने डाइविंग करना शुरू किया।

पलक सबसे कम उम्र 17 साल की डाइवर हैं। उन्होंने आठ साल से ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने 38 वें राष्ट्रीय खेलों में दो गोल्ड और एक सिल्वर जीत लिए हैं।  गोवा राष्ट्रीय खेलों में दो गोल्ड, एक सिल्वर और गुजरात में दो सिल्वर मेडल जीते हैं। पलक अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भी धाक जमा चुकी हैं और आने वाली प्रतियोगिताओं में फिर से अपना दमदार प्रदर्शन दिखाने के लिए तैयार हैं। वह एशियन एज ग्रुप में एक गोल्ड व एक सिल्वर जीत चुकी हैं।  साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, इंडोनेशिया इन्वीटेशन मीट, सिंगापुर इन्वीटेशन मीट में प्रतिभाग किया। 


मिमिक्री करने का है शौक
पलक के पिता एक बिजनेस मैन हैं और एक्टिंग भी करते हैं। वह कई सीरियल में काम कर चुके हैं। उनका  छोटा भाई 8 साल का है जिसने हाल ही में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया है।  पलक ने बताया कि उन्हें शुरू से ही स्पोर्ट्स पसंद है।  साथ ही उन्हें मिमिक्री और सिंगिंग करना पसंद है। बताया कि उन्हें जब भी स्ट्रेस होता है तो वह डांस करती हैं।  कहा कि डाइविंग देखने में जितना सुंदर स्पोर्ट्स लगता है, वास्तव में यह उतना ही कठिन भी है।  

 

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