Bareilly: 93 बीघा प्राकृतिक झील जमींदार ने कर दी खुर्द-बुर्द, जो बची उस पर भी कब्जा
1344 फसली वर्ष के बाद जिस तरह फसली वर्ष बदलते गए, उसी तरह झील का स्वरूप भी घटता रहा
राकेश शर्मा, बरेली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की मुख्य पीठ में नैनीताल रोड पर आवासीय एल्डिको सिटी में प्राकृतिक झील दबाने के जिस प्रकरण की सुनवाई चल रही है, उस झील के रकबे की जिला अभिलेखागार में संचित अभिलेखों और कई फसली वर्षों के खतौनियों की जांच की गयी तो बिलवा की झील का कई दशकों पहले का इतिहास सामने आया है।
तहसील सदर की जांच टीम की रिपोर्ट कहती है कि बिलवा में जमींदारी व्यवस्था के दौरान 93 बीघा, 9 बिस्वा क्षेत्रफल में झील दर्ज थी। 1344 फसली वर्ष के बाद जिस तरह फसली वर्ष बदलते गए, उसी तरह झील का स्वरूप भी घटता रहा। जमीदार ने नियमों को दरकिनार कर झील का रकबा काश्तकारों को आवंटित कर दिया। वर्तमान में एल्डिको सिटी में दबी 508 गाटा संख्या वाली झील उसी का अंश बचा है, जो अब एक बीघा 15 बिस्वा में सिमटकर रह गयी। इस पर भी अतिक्रमण है और उसे बचाने के लिए एनजीटी में केस की सुनवाई हो रही है।
एनजीटी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने अक्टूबर, 2024 में तहसील सदर की टीम से जांच करायी। जांच टीम में राजस्व निरीक्षक हरी प्रकाश, लेखपाल महेंद्र पाल ने कलेक्ट्रेट स्थित जिला अभिलेखागार में संचित अभिलेखों का अवलोकन किया। जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम बिलवा के बस्ते में सन 1344 फसली का बंदोबस्त अभिरक्षित है। सन 1344 फसली (जमींदारी व्यवस्था प्रभावी थी) में गुहाल बंसती जगन 15 गैर मुमकिन के खाता संख्या 116 में गाटा संख्या 376 मि, रकबा 67 बीघा 4 बिस्वा, गाटा संख्या 490 में रकबा 5 बीघा, गाटा संख्या 380 मि रकबा 20 बीघा 17 मिनट व 354 रकबा 8 बिस्वा कुल रकबा 93 बीघा, 9 बिस्वा बतौर झील अंकित है।
इसके साथ सन 1359 फसली (नॉन जेड ए खतौनी) के खाता संख्या 150 पर जमन 15 गैर मुमकीन आराजी (जिस पर पानी है) के खाते में बतौर झील गाटा संख्या 376/2 रकबा 9 बीघा 12 बिस्वा, 376/2/2 रकबा 12 बीघा, 2 बिस्वा व 376/2/1 रकबा 1 बीघा कुल रकबा 22 बीघा 14 बिस्वा, गाटा संख्या 380/1 रकबा 19 बीघा एक बिस्वा व 490/1 रकबा 2 बीघा 14 बिस्वा दर्ज है। इस प्रकार खाता संख्या 150 पर झील के रूप में कुल रकबा 44 बीघा 9 बिस्वा है।
राजस्व टीम ने सन 1359 फसली की खतौनी का अवलोकन किया तो स्पष्ट है कि ग्राम बिलवा में सन 1359 फसली में जमींदारी व्यवस्था समाप्त नहीं हुई थी, इस प्रकार यह स्पष्ट है कि झील का कुल रकबा 1344 फसली में 93 बीघा 9 बिस्वा था। वह 1359 फसली तक घटकर 44 बीघा 9 बिस्वा रह गया।
1344 फसली से 1359 फसली के बीच के कोई भी पठनीय अभिलेखागार के बस्ते में उपलब्ध नहीं हैं। जिससे यह जानकारी करना संभव नहीं है कि जमींदार ने किस प्रकार से झील के रकबे को काश्तकारों को वितरित किया था। यहां यह उल्लेखनीय है कि यूपी टेनेन्सी एक्ट 1939 की धारा 36(1) के अनुसार जलमग्न भूमि पर किसी का वंशानुगत अधिकार उत्पन्न नहीं हो सकता है।
अभिलेख फटे और खतौनी उपलब्ध न होने से कुछ चीजें स्पष्ट नहीं हुईं
राजस्व टीम ने जिला अभिलेखागार के बस्ते में उपलब्ध सन 1360 फसली की खतौनी भी देखी थी, उसके अवलोकन से स्पष्ट हो रहा है कि सन 1360 फसली में जमींदारी व्यवस्था समाप्त हो गयी थी। जेड-ए की खतौनी तैयार की गयी थी लेकिन 1360 फसली की खतौनी का वह भाग फट चुका है जिसमें ग्राम सभा की संपत्ति दर्ज हुई होगी। सन 1360 फसली (जिसे मूल जेड-ए खतौनी माना जाएगा) से स्पष्ट नहीं हो सका कि सन 1359 फसली में जमन 15 में अंकित झील का रकबा 44 बीघा 9 बिस्वा भी जेड ए खतौनी के श्रेणी 6-1 जलमग्न भूमि के रूप में दर्ज हुआ अथवा नहीं। 1361 फसली की खतौनी उपलब्ध नहीं है।
राजस्व टीम ने अभिलेखों की जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला
राजस्व टीम ने 20 अक्टूबर, 2024 को उच्चाधिकारियों को भेजी अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि सहायक चकबंदी अधिकारी मुकदमा नंबर 1724/02.02.1988 के जिल्द बंदोबस्त के अनुसार अंकित झील का रकबा वर्तमान खतौनी सन 1428-1433 फसली के गाटा संख्या 508, 712 व 713 पर बतौर झील दर्ज है।
इस प्रकार जांच से यह स्पष्ट है कि सन 1344 फसली से 1359 फसली तक जमींदार ने झील के कुल रकबा 49 बीघा भूमि सरदार खातेदारों के मध्य वितरित कर दी थी, जो नियमानुसार नहीं किया जा सकता है। सन 1359 फसली में उपलब्ध भूमि 44 बीघा 9 बिस्वा में से 40 बीघा 15 बिस्वा भूमि या तो सन 1360 या 1361 फसली में आवंटन (आसामी या सीरदार) के तौर पर कर दी गयी है। इसके अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। सन 1366 फसली की बंदोबस्त में उपलब्ध झील की भूमि 3 बीघा 4 बिस्वा सन 1397 फसली के जिल्द बंदोबस्त में 1 बीघा 15 बिस्वा अवशेष रह गयी जो वर्तमान समय तक मौजूद है।
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