महोली में दरोगा के बेटे को ही बना दिया ‘इंस्पेक्टर’

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Edited By Amrit Vichar
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एसपी के आदेश को दिखाया ठेंगा, बालिकाओं या छात्राओं को बनाया जाना था एक दिन का थानेदार सीतापुर। महोली पुलिस द्वारा एसपी की पहल और मंशा को तारतार करते हुए कोतवाली के एक दरोगा के बेटे को ही एक दिन का थानेदार बना दिया गया। इससे एक ओर जहां महोली पुलिस द्वारा एसपी के आदेश …

एसपी के आदेश को दिखाया ठेंगा, बालिकाओं या छात्राओं को बनाया जाना था एक दिन का थानेदार

सीतापुर। महोली पुलिस द्वारा एसपी की पहल और मंशा को तारतार करते हुए कोतवाली के एक दरोगा के बेटे को ही एक दिन का थानेदार बना दिया गया। इससे एक ओर जहां महोली पुलिस द्वारा एसपी के आदेश की धज्जियां उड़ाईं गईं वहीं दूसरी ओर पब्लिक में इसकी निंदा की जा रही है। बुद्धिजीवियों के मुताबिक इससे पब्लिक में अच्छा संदेश नहीं गया।

विश्व बाल दिवस के अवसर पर मिशन शक्ति के तहत जनपद के थानों में बालिकाओं व छात्राओं को एक दिन का थानेदार बनाया जाना था। इसको देखते हुए जिले के करीब सभी थानाध्यक्षों ने कस्बे व आसपास इलाके से पब्लिक के बीच की छात्राओं को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष बनाकर पुलिसिंग से अवगत कराया। यही नहीं कार्यालय में अभिलेखों के निरीक्षण से लेकर व्यवस्था से रूबरू कराया गया। साथ ही थाना परिसर से बाहर वाहनों के चालान की प्रक्रिया भी कराई गई। इस पहल के पीछे जहां खासकर छात्राओं को पुलिस के अच्छे व्यवहार और बेहतर पुलिसिंग से रूबरू कराना था, लेकिन महोली इंस्पेक्टर आलोक मणि त्रिपाठी ने एसपी की इस मंशा को दरकिनार करते हुए न सिर्फ छात्रा के बजाय छात्र को एक दिन का कोतवाल बनाया बल्कि अपने ही कोतवाली क्षेत्र की पाताबोझ चैकी इंचार्ज केसी तिवारी के पुत्र प्रांशु तिवारी को एक दिन का थानेदार बना दिया। महोली पुलिस के इस कार्य की निंदा हो रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिसकर्मी के बेटे को यह जिम्मेदारी देना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन एसपी द्वारा पब्लिक में अच्छा संदेश देने के उद्देश्य से कस्बा व आसपास की छात्रा या बालिका को ही एक दिन थानेदार बनाना चाहिए था। जिससे पब्लिक के बीच अच्छा संदेश जाता।

बोले अधिकारी

दरोगा के बेटे को एक दिन का थानेदार बनाने की जानकारी उनको नहीं है, ऐसा नहीं होना चाहिए। इस बारे में इंस्पेक्टर से वार्ता की जाएगी।

अभिषेक प्रताप, सीओ सदर

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