धान खरीद का सच: फसल उगाकर किसान काट रहा सजा
समर्थन मूल्य का व्यापारी ले रहे मजा अमृत विचार दरियाबाद। धान खरीद की सुस्त प्रक्रिया से किसानों का दर्जनों ट्राली धान क्रय केंद्रों पर बिक्री का इंतजार कर रहा है खसरा खेतौनी का सही सत्यापन न होने के कारण व्यापारियों और विचौलिये मलाई काट रहे है और क्षेत्र के किसान परेशान है धान खरीद को …
समर्थन मूल्य का व्यापारी ले रहे मजा
अमृत विचार दरियाबाद। धान खरीद की सुस्त प्रक्रिया से किसानों का दर्जनों ट्राली धान क्रय केंद्रों पर बिक्री का इंतजार कर रहा है खसरा खेतौनी का सही सत्यापन न होने के कारण व्यापारियों और विचौलिये मलाई काट रहे है और क्षेत्र के किसान परेशान है धान खरीद को लेकर दरियाबाद क्षेत्र ही नही बल्कि पूरे जिले में हाय तौबा मची है लेकिन व्यापारियों पर इसका कोई असर नही पड़ रहा क्षेत्र के छोटे किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे है तो व्यापारियों द्वारा सिस्टम को साध कई ट्राली धान क्रय केंद्र पर तौल होने की चर्चा है क्षेत्रीय किसान अपनी बारी का इंतजार कर क्रय केंद्र पर झड़प करते भी सुने जाते है तो कुछ किसानों की राते हफ्ते भर से क्रय केंद्र पर गुजर रही है क्षेत्र में सुस्त धान खरीद व क्रय केंद्रों की कमी किसानों को व्याकुल कर रही है तो वही अगर सूत्रों की माने तो व्यापारियों और रसूखदार लोगो का धान क्रय केंद्र पर तौल किया जाता है जबकि व्यापारी वर्ग प्रतिकुन्तल एक रकम क्रय केंद्र पर देते है जिससे उनका धान बिना टोकन के तौल किया जाता है जिससे क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है
गौरतलब हो कि दरियाबाद क्षेत्र में धान क्रय केंद्रों की कमी होने से क्षेत्रीय किसान परेशान है किसानों का दर्जनों ट्राली धान क्रय केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रहा है धान खरीद की सुस्त प्रक्रिया अन्नदाताओं पर भारी पड़ रही है क्रय केंद्र पर बिक्री को आयी ट्रालियों की रखवाली करने में किसानों की सर्द राते क्रय केंद्र पर गुजर रही है लाख कोशिशों के बावजूद दरियाबाद विकास खण्ड के किसानों को धान की बिक्री के लिए समस्याओं से जूझना पड़ रहा है दरियाबाद विकास खण्ड में तीन क्रय केंद्र के भरोसे धान की खरीदारी की जा रही हैं सरकार किसानों की उपज का उचित मूल्य दिलाए जाने का दावा तो कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बया कर रही है धान क्रय केंद्र पर तौल न होने से किसान अपनी उपज को आढ़तियों और व्यापारियों को औने पौने बेचने को मजबूर है किसान के सामने गेंहू की फसल की बुवाई चुनौती बन रही है नौ सौ से एक हजार रुपये प्रति कुंतल बिक रहा धान किसान के अरमानों पर पानी फेर रहा है एक ओर किसानों को टोकन की मारामारी का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ क्रय केंद्रों पर लगी दर्जनों ट्रालियां अपनी बारी का इंतजार कर रही है व सही सत्यापन न होने का खमियाजा क्षेत्र के असली किसान भुगत रहे है क्षेत्र के किसानों का पंजीकरण लगा व्यापारी मौज काट रहे है किसानों के गुस्से को देखते हुये यह प्रतीत हो रहा है किसान अपनी भड़ास चुनाव में निकाल सकते है
यह हो उपाय तो किसानों को मिले लाभ
सरकार किसानों के बीच से बिचौलियों को हटाने की बात तो करती है लेकिन ठोस उपाय न होने से किसानों को मिलने वाला फायदा व्यापारी उठा रहे है अगर क्षेत्रीय लेखपालो द्वारा किसान के खेत मे लगी फसल का ही सत्यापन किया जाये और उसी के अनुसार धान तौल की लिमिट बने तो कुछ हद तक इस पर काबू पाया जा सकता है ऐसा न होने से जिन किसानों के खेत मे धान की फसल नही बोई गयी है उनके खाते खेतौनी का इस्तेमाल कर व्यापारी मौज काट रहे नौ सौ रुपये से एक हजार तक व्यापारियों द्वारा खरीद किया गया धान सरकार द्वारा समर्थित मूल्य पर व्यापारी बेच रहे है क्रय केंद्रों पर प्रति कुंतल एक रकम देकर भी व्यापारी प्रति कुंतल पाँच सौ रुपये की बचत करते है क्रय केंद्र पर प्रति कुंतल मिलने वाले कमीशन से केंद्र प्रभारी अपनी आय दुगनी करने के चक्कर मे किसानों से ज्यादा व्यापारियों को महत्व देते है जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है
