हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त और उपायुक्त से मांगा जवाब, अधिवक्ता को किया था नजरबंद

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय परिसर में प्रशासनिक न्यायाधीश के दौरे के दौरान 70 वर्षीय अधिवक्ता पर 'निगरानी' बनाए रखने के औचित्य पर पुलिस आयुक्त, आगरा से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त प्रशासनिक न्यायाधीश के दौरे के दौरान अधिवक्ता की गतिविधियों पर निगरानी रखने की नीति को स्पष्ट करें और प्रशासनिक न्यायाधीश के पिछले दौरे के दौरान जिला प्रशासन द्वारा बरती गई सावधानी और सतर्कता का ब्यौरा भी प्रस्तुत करें। इसके अलावा जिन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, उन पुलिस उपायुक्त और संबंधित पुलिस अधिकारी को मामले की अगली सुनवाई यानी 18 मार्च को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। 

उक्त आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने महताब सिंह की याचिका पर विचार करते हुए पारित किया। कोर्ट ने पाया कि प्रशासनिक न्यायाधीशों का संबंधित जिले का दौरा एक नियमित मामला है और इसे किसी अधिवक्ता को घर में नजरबंद करने का आधार बनाना उचित नहीं है। मालूम हो कि महताब सिंह को उस दिन 15 मामलों में कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना था। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 168 के तहत अधिवक्ता को नोटिस देने के औचित्य का स्पष्टीकरण मांगा।

 दरअसल पुलिस ने पहले निवारक नोटिस जारी करने को उचित ठहराते हुए कहा था कि 1988 में अधिवक्ता के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। हालांकि कोर्ट ने पाया कि यह कोर्ट परिसर में हुई एक घटना से संबंधित था, जिसमें 40-50 से अधिक अधिवक्ता शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश ने पिछले कई दशकों के दौरान कई बार दौरा किया होगा, इसलिए कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह पिछले 10 वर्षों के दौरान याची के खिलाफ की गई इसी तरह की कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उक्त निर्देश यह पता लगाने के लिए दिया गया कि क्या पुलिस की ऐसी कार्रवाई नियमित अभ्यास का हिस्सा है या यह अपने आप में एक अलग मामला है। 

मामले के अनुसार 15 नवंबर 2024 को चार पुलिस अधिकारी याची के घर आए और उन्हें नोटिस देते हुए कहा कि आगरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मौखिक रूप से  प्रशासनिक न्यायाधीश के दौरे के दौरान अधिवक्ता को उनके घर में ही नजरबंद रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट को बताया गया कि अधिवक्ता को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक उनके घर में नजरबंद रखा गया तथा एक दिन बाद भी पुलिस ने उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रयास किया। अंत में कोर्ट ने अधिकारियों को तलब किया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बीएनएसएस की धारा 168 के तहत याची के खिलाफ कार्यवाही और नोटिस जारी करने का आदेश किसने दिया।

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