कुत्ता टहलाने के विवाद में युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या

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पुलिस ने दो महिलाओं समेत छह लोगों पर दर्ज किया केस सिधौली, सीतापुर। कुत्ते को टहलाने को लेकर हुए विवाद में युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर कर दी गई। घटना के बाद हमलवार फरार हो गए। एहतियातन कई थानों की फोर्स पीडि़त परिवार के घर तैनात रही। पुलिस की मौजूदगी में शव का …

पुलिस ने दो महिलाओं समेत छह लोगों पर दर्ज किया केस

सिधौली, सीतापुर। कुत्ते को टहलाने को लेकर हुए विवाद में युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर कर दी गई। घटना के बाद हमलवार फरार हो गए। एहतियातन कई थानों की फोर्स पीडि़त परिवार के घर तैनात रही। पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मामले में दो महिलाओं सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

कस्बे के मोहल्ला बाजार में शनिवार को पूर्व सभासद किशन के भाई सचिन पुत्र प्रेमशंकर उर्फ पुतन्नी और मोहल्ले के उमाशंकर व रोहित पुत्रगण परशुराम, गोविंदा पुत्र मुन्ना के बीच पालतू कुत्ते को टहलाने को लेकर कहासुनी हो गयी थी। बताते हैं कि रविवार देर रात लोगों में फिर विवाद हो रहा था। तभी सचिन के पिता प्रेम शंकर व सचिन का भाई सोनू व सुनील कोतवाली सूचना देने के लिए जाने लगे। इसी दौरान उक्त आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। भाई सोनू व सुनील को बचाने दौड़े सचिन पर हमलावरों ने चाकू से कई वार कर दिए। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर कोतवाली प्रभारी रामप्रकाश पुलिस टीम के साथ पहुंचे और घायल सचिन को सीएचसी सिधौली पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने सचिन को मृत घोषित कर दिया। देर रात तक परिजनों ने मृतक सचिन के शव को सभी आरोपियों की गिरफ्तारी से पूर्व शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने का विरोध करते रहे। कोतवाली प्रभारी के आश्वासन के उपरांत शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। सोमवार को पोस्टमार्टम के उपरांत शव पहुंचने पर आशंका के चलते कई थानों की पुलिस तैनात रही। हल्के विरोध के बाद परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार किया। कोतवाली प्रभारी रामप्रकाश ने बताया कि पीडि़त पक्ष की तहरीर पर दो महिलाओं समेत छह लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है।

पुलिस गंभीर होती तो बच सकती थी सचिन की जान

सूत्र बताते हैं कि शनिवार को दोनों पक्षों में विवाद होने के बाद सचिन के पिता प्रेम शंकर व उनका पुत्र कोतवाली में सूचना देने गए थे लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लेकर उन्हें वापस भेज दिया। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय से प्रभावी कार्रवाई करती तो शायद सचिन की जान बच सकती थी।

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