बरेली: अफसरों के दावों की पोल खोल रहे पॉलिथीन के ढेर

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में बेहतर रैकिंग लाने के साथ ही इंदौर सिटी की तरह स्वच्छ बरेली बनाने का सपना नगर निगम के अफसर देख रहे हैं। पर हकीकत तो यह है कि सपने को साकार करने की दिशा में धरातल पर ठोस पहल नहीं की जा रही है। प्रतिबंधित पालिथीन का उपयोग रोकने …

बरेली,अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में बेहतर रैकिंग लाने के साथ ही इंदौर सिटी की तरह स्वच्छ बरेली बनाने का सपना नगर निगम के अफसर देख रहे हैं। पर हकीकत तो यह है कि सपने को साकार करने की दिशा में धरातल पर ठोस पहल नहीं की जा रही है। प्रतिबंधित पालिथीन का उपयोग रोकने की कार्रवाई कागजों में सिमट कर रह गई है। इसका पुख्ता प्रमाण शहर के पालीथिन व कूड़े के ढेर और छोटे-बड़े नाले पटे दिखाई दे रहे हैं।

अक्टूबर 2019 से शहर पालीथिन के उपयोग पर नगर निगम ने प्रतिबंध लगा रखा है। इसको लेकर नगर निगम का पर्यावरण और स्वस्थ्य महकमा ने कार्रवाई भी की है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एक साल में 10 क्विंटल से पालीथिन जब्त की जा चुकी है। यह सभी कार्रवाई थोक दुकानदारों पर ही की गई है। पर सच तो यह है कि शहर में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।

शहर के सुभाष नगर मोहल्ले में बुधवार को कूड़े पर पालिथीन अधिक दिखाई दे रही थीं। 20 से 25 पशु पालिथीन में चारा-दाना तलाश रहे थे। पीलीभीत बाइपास रोड पर सड़क के किनारे कूड़े के ढेर पर पालीथिन नगर निगम की कूड़ा गाड़ियां गिराते देखी गईं।

शहर के कई नाले पालिथीन से पटने की वजह से चोक हो चुके हैं। शहर का शायद ही कोई डलावघर हो जहां, पर पालिथीन का ढेर न मिले। यहां तक की आफिसों में भी कई जगहों पर पालीथिन का उपयोग करते हुए लोग देखे गए। कई जगहों पर तो पलीथिन पर प्रतिबंध के आदेश का जिन्हें पालन करना हैं। वहीं, सिंगल यूज पालीथिन व प्लास्टिक का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं।

अफसरों की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। ठेलिया दुकानदारों से लेकर चाय और परचून की बड़ी दुकानों तक पालिथीन का उयोग हो रहा है। शायद इसी का नतीजा है कि शहरी क्षेत्रों में जल निकासी के लिए पालिथीन अभिशाप बन चुकी है। नाले नालियां पालिथीन से पटे पड़े हैं। इसका दुष्परिणाम है कि जल-निकासी व्यवस्था चौपट हो रही है।

50 माइक्रान से कम पालिथीन प्रतिबंधित, सजा भी हो सकती है
वर्तमान में 50 माइक्रॉन से कम मोटाई के प्लास्टिक का उपयोग करने पर उसके जब्त कर लिये जाने का प्रावधान है। यही नहीं मानक से कम मोटाई की प्लास्टिक के निर्माण, स्टोरेज, निर्यात, वितरण, बिक्री या परिवहन के हिसाब से अलग-अलग तरह की जुर्माना राशि तय कर दी गई है।

अधिनियम के मुताबिक 2 अक्तूबर के बाद पालीथिन व प्लास्टिक की सामग्री के प्रयोग पर प्रतिबंध का पहली बार उल्लंघन करने पर एक माह तक की सजा या न्यूनतम एक हजार और अधिकतम 10 हजार रुपये तक का अर्थदंड देना होगा। दूसरी बार के उल्लंघन पर छह माह की जेल या न्यूनतम 5 हजार व अधिकतम 20 हजार रुपये तक जुर्माना देना होगा।

“पालीथिन का उपयोग करना दंडनीय अपराध है। इसके खिलाफ अभियान में चलाया जाता रहा है। कई बार भारी मात्रा में पालीथिन जब्त की गई है। लोगों को इसके प्रति खुद भी सजग होना चाहिए।” -डा. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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