राहत की बात
दुनिया में लोगों को कोरोना से लड़ते हुए लगभग 11 महीने निकल चुके हैं। यूरोप के कई देश संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चिंतित हैं। भारत में भी संक्रमितों की संख्या एक करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में ये समाचार काफी राहत देने वाले हैं कि अगले कुछ माह में इस महामारी …
दुनिया में लोगों को कोरोना से लड़ते हुए लगभग 11 महीने निकल चुके हैं। यूरोप के कई देश संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चिंतित हैं। भारत में भी संक्रमितों की संख्या एक करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में ये समाचार काफी राहत देने वाले हैं कि अगले कुछ माह में इस महामारी पर काबू पाने के लिए वैक्सीन तैयार होकर आ जाएगी।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की जहां बीते दिनों संक्रमण के मामले बढ़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैक्सीन कब आएगी, यह वैज्ञानिकों के हाथ में है। कुछ लोग इसे लेकर राजनीति करते हैं।
जाहिर है उनका इशारा राहुल गांधी की ओर था, जिन्होंने इस बैठक से एक दिन पहले ही वैक्सीन को लेकर कुछ सवाल उठाए थे। इन सवालों में प्रधानमंत्री ने विपक्ष की राजनीति देखी पर महामारी के कारण बन चुकी गंभीर परिस्थितियों के बीच अच्छी बात ये है कि अब दुनिया वैक्सीन की बात करने लगी है। कई बड़ी दवा कंपनियों के टीके परीक्षण के अंतिम दौर में आ चुके हैं और उनके अब तक के नतीजे उम्मीद बंधाने वाले रहे हैं।
भारत में अभी तक पांच संस्थान वैक्सीन बनाने के काम में लगे हैं। नए साल के पहले कुछ महीनों में भारत को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोविड -19 वैक्सीन की पहली खेप मिलने की संभावना है। भारत बायोटेक के कोविड-19 के टीके कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण शुरू हो गया है।
कोविड -19 वैक्सीन व टीकाकरण कार्यक्रम के संबंध में कई चिंताएं हैं जिन पर केंद्र को ध्यान देना चाहिए। वैक्सीन के चयन में वैज्ञानिक परीक्षणों से प्रभावशीलता की पुष्टि के साथ तय मानकों का पालन करना होगा। संभावना है कि देश को बड़ी आबादी के लिए वैक्सीन को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के सहयोग पर निर्भर रहना होगा।
सरकार को यह सुनिश्चित कराना होगा कि टीके अंततः समाज के आर्थिक रुप से कमजोर तबके तक पहुंचे। इनमें सामाजिक रूप से वंचित समूहों को भी शामिल किया जाना होगा। पोलियो और तपेदिक के लिए स्वदेशी टीकाकरण कार्यक्रमों के अनुभव इस संदर्भ में फायदेमंद हो सकते हैं। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने भी देश को सबसे अच्छी वैक्सीन मुहैया कराने का भरोसा दिया है। अब देश को अपनी दवा भंडारण क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण का कार्य करना चाहिए।
