बरेली: ‘आस्था की डुबकी’ पर संगीनों का पहरा
बरेली,अमृत विचार। कार्तिक पूर्णिमा पर अपनी भव्यता की पहचान रखने वाला बरेली का चौबारी मेला इस बार नहीं लगा। कोविड 19 संक्रमण के चलते जिला प्रशासन ने चौबारी मेले की अनुमति ही नहीं दी थी। ऐसा पहली बार हुआ जब पर्व पर श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस के जवान श्रद्धालुओं को …
बरेली,अमृत विचार। कार्तिक पूर्णिमा पर अपनी भव्यता की पहचान रखने वाला बरेली का चौबारी मेला इस बार नहीं लगा। कोविड 19 संक्रमण के चलते जिला प्रशासन ने चौबारी मेले की अनुमति ही नहीं दी थी। ऐसा पहली बार हुआ जब पर्व पर श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस के जवान श्रद्धालुओं को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। फिर भी कुछ श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
गंगा स्नान के अवसर पर लगने वाले चौबारी मेले में कई जिलों से लोग पहुंचते रहे हैं। कोविड के चलते ऐसा पहली बार हुआ जब यह मेला नहीं लगा। सिर्फ परंपरा ही निभाई गई। मेला समिति की तरफ से आयोजकों ने डीएम कार्यालय में आवेदन दिया था लेकिन उन्हें सिर्फ परंपरा निभाने की अनुमति मिली थी। इसमें पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था रखी गई। सुबह से ही रामगंगा घाट पर श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे तो वहां तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका और समझा-बुझाकर वापस घर भेजा।
नौका चालक और फुटपाथ बाजार वाले रहे परेशान
चौबारी मेला लगता था तो हर जगह उमंग उत्साह और भक्ति का ज्वार चरम पर होता था। नौका चलाने वाले और फुटपाथ पर बाजार लगा खिलौने, खाने-पीने आदि की बिक्री कर जीवनयापन करने वाले इस मेले का बेसब्री से इंतजार करते थे। मेले के दिन नौका चालक एक सवारी के नौका विहार कराने पर 30 से 40 रुपये लिया करते थे लेकिन इस बार वे सिर्फ आम दिनों की तरह 10 रुपये ही लेते दिखाई दिए। इस बार सभी दुकानदार परेशान रहे।
छिपते-छिपाते स्नान करने में कामयाब हुए लोग
जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए मेले को लेकर काफी सतर्कता बरती गई। घाट पर जाने वाले प्रत्येक रास्ते पर पुलिस के जवान तैनात थे। फिर भी कुछ श्रद्धालुओं ने घाट पर जाकर स्नान किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की।
नंदी बाबा को लेकर मायूस होकर लौटे बाबा
मेले पर नंदी बाबा को लेकर पहुंचने वाले बाबा भी श्रद्धालुओं के आने पर मायूस होकर लौटते दिखाई दिए। नंदी बाबा पर चढ़ने वाले चढ़ावे से जीवन गुजर बसर करने वालों को भी मायूसी ही हाथ लगी। मेला न लगने और श्रद्धालुओं के न आने से उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ा।
“हर साल मेले पर नौका विहार करने के लिए लोगों का हुजुम उमड़ पड़ता था। इस बार तो लोग रोक लगने की वजह से पहुंच ही नहीं पाए है। मेले पर एक श्रद्धालु से नौका विहार के लिए 30 से 40 रुपये लेते थे। इस बार तो रोजाना की तरह 10 रुपये ही ले रहे हैं लेकिन कोई आ ही नहीं रहा।” -नदीम, नौका चालक
“भमौरा से आया हूं, गंगा स्नान करने के लिए। करीब तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ा है। जगह-जगह पुलिस के जवान रोक रहे हैं। बहुत मुश्किल से पहुंच पाया हूं, गंगा स्नान हो गया है। अब वापस घर जा रहा हूं। पहले जैसा नजारा नहीं है। कोरोना ने सब खत्म कर दिया।” -कल्लू, श्रद्धालु
