बरेली: चार लाख ग्राहकों का बदलेगा बैंक खाता नंबर और कस्टमर आइडी
अमृत विचार, बरेली। केंद्र सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ माह पूर्व बैंकों के विलय का एलान किया था। इसके बाद कॉर्पोरेशन समेत कई बैंकों का विलय हो गया मगर कस्टमर आईडी, खाता नंबर और आईएफएससी कोड में बदलाव नहीं किया था। अब 1 दिसंबर से इसमें भी बदलाव होने जा रहा है। …
अमृत विचार, बरेली। केंद्र सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ माह पूर्व बैंकों के विलय का एलान किया था। इसके बाद कॉर्पोरेशन समेत कई बैंकों का विलय हो गया मगर कस्टमर आईडी, खाता नंबर और आईएफएससी कोड में बदलाव नहीं किया था। अब 1 दिसंबर से इसमें भी बदलाव होने जा रहा है। इसकी जानकारी खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से दी जा रही है। इस हिसाब से जिले के चार लाख से अधिक खाताधारकों के खातों में बदलाव होगा।
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि कुछ माह पूर्व जब बैंकों का विलय हुआ तो बैंकों के नामों में तो परिवर्तन कर दिया गया था लेकिन ग्राहकों की चेक बुक, खाता नंबर, कस्टमर आईडी, एटीएम कार्ड और आईएफएससी कोड नहीं बदला गया। इसे लेकर शुरू में गाइडलाइन नहीं मिलने की बात कही गई थी। अब बैंकों की सहमति पर एक दिसंबर से ग्राहकों के खाता नंबर के साथ ही आईएफएससी कोड में बदलाव शुरू होगा।
हालांकि, खाताधारकों की परेशानियों को देखते हुए सप्ताह भर पहले से ही बैंक रजिस्टर्ड मोबाइल पर मैसेज भेजकर सूचना दे रहे हैं लेकिन उन खाताधारकों के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी जिनका मोबाइल नंबर बैंकों में पंजीकृत नहीं है। इसका तोड़ भी बैंकों ने निकाल लिया है। इसके बंद होने वाली बैंक शाखाओं के बाहर नोटिस चस्पा किया जाएगा। नोटिस में उल्लिखित किया जाएगा कि संबंधित बैंक शाखा का विलय उक्त बैंक शाखा में हो चुका है। इससे ग्राहक जब जाएगा तो उसे जानकारी दे दी जाएगी।
इधर, जानकार बताते हैं कि 1 दिसंबर से होने वाले बदलाव को देखते हुए कई बैंकों ने करीब दस दिन से ही ग्राहकों से चेक लेना बंद कर दिया था। अफसर इस बात को नकार रहे हैं। उनका कहना है तकनीकी समस्या के कारण चेक क्लीयर नहीं हो पा रहे।
इन बैंकों का हुआ है विलय
ओरियंटल बैक ऑफ कामर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक में, देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में, सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक में, इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में, कॉरपोरेशन बैंक और आंध्रा बैंक का यूनियन बैंक में विलय किया गया है।
सावधानी बरतने की अपील
बैंकों के विलय होने के बाद खाता नंबर और आईएफएससी कोड में बदलाव होना है। इस बीच ठगी करने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। वह लोगों के पास फोन कॉल कर गोपनीय जानकारी मांग रहे हैं जिसके चलते लोग ठगी का शिकार हो सकते हैं। अफसरों का कहना है कि बैंकों द्वारा मैसेज के माध्यम से किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी शेयर नहीं करने के लिए ग्राहकों से अपील करने के साथ ही उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।
ग्राहकों को नहीं होगी कोई खास परेशानी
कुछ बैंकों का विलय तो पहले ही चुका था। अब खाता नंबर, कस्टमर आईडी और आईएफएससी कोड में बदलाव होना है। कुछ बैंकों में यह प्रकिया 1 दिसंबर से शुरू हो जाएगी। वहीं, कुछ में जनवरी और फरवरी में शुरू होगी। इस व्यवस्था से ग्राहकों को कोई खास परेशानी नहीं होगी। कर्जदारों को भी ब्याज को लेकर कोई चिंता करने की जरूरत नहीं। इसके अलावा कुछ ग्राहक जिनका सैलरी अकाउंट इन बैंकों में है, उनके पैसे आने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। बैंक के आईएफएससी कोड सिस्टम में स्वत: बदलाव कर लिया जाएगा।-पीके माहेश्वरी, महामंत्री, यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन
जिन बैंकों का दूसरे बैंक में विलय किया गया है उनके ग्राहकों का कस्टमर आईडी, आईएफएससी कोड और खाता नंबर बदल जाएगा। खाताधारकों को बैंकों में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। किसी भी तरह की समस्या व जानकारी के लिए खाताधारक संबधित बैंकों से संपर्क करें।- एमएम प्रसाद, अग्रणी जिला प्रबंधक
