चीन की हरकतें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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दक्षिण चीन सागर में जिस तरह चीन अपने पैर पसारने की नीति पर काम कर रहा है, वैसा ही वह लगातार भारतीय सीमा पर भी कर रहा है। रविवार को चीनी मीडिया से खबरें मिलीं कि चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत में एक बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। …

दक्षिण चीन सागर में जिस तरह चीन अपने पैर पसारने की नीति पर काम कर रहा है, वैसा ही वह लगातार भारतीय सीमा पर भी कर रहा है। रविवार को चीनी मीडिया से खबरें मिलीं कि चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत में एक बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है।

ब्रह्मपुत्र नदी से बांध बनने पर चीन इसका इस्तेमाल भारत को नुकसान पहुंचाने में कर सकता है। चीन के पानी रोक लेने से भारत के राज्यों में सूखे की स्थिति बन सकती है। जबकि अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़कर वह देश में बाढ़ के हालात पैदा कर सकता है। चीन हर तरीके से भारत को घेरता रहता है। चीन की यह गतिविधियां जारी रहीं तो तनाव बढ़ेगा ही। अमेरिकी संसद में भारतवंशी डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने लद्दाख के निकट चीन द्वारा करवाए जा रहे निर्माण कार्यों को भी भड़काने वाली हरकत करार दिया है।

उधर चीन-पाकिस्तान गलियारे की मदद से पश्चिमी सीमा के पास सड़कों का जाल बिछा रहा है। पश्चिमी सीमा के सामने कई नए एयरपोर्ट बनाए जाने की जानकारी मिली है। दरअसल चीन लद्दाख के बाद पश्चिमी सीमा से भारत की घेराबंदी में लगा है। इसके अलावा गुजरात के सामने सीमा पार मीठी क्षेत्र में भी नया एयरपोर्ट बन रहा है व चाइना-पाकिस्तान कॉरिडोर के नाम पर कई रेल लाइन व सड़कों का जाल बिछाने की पश्चिमी सीमा पर कोशिशें जारी हैं।

अब चीन का प्रतिरोध करना कोई शगल नहीं, बल्कि हमारी मजबूरी है। सेना को हर हालात में चौकन्ना रहना होगा, क्योंकि चीन के ऊपर विश्वास करना घातक भी हो सकता है। चीन की ताकत को ही इसके खिलाफ हथियार बनाया जाना चाहिए। इसने ज्यादातर पड़ोसी देशों को विरोधी बना दिया है। इसकी आसपास और दूरस्थ देशों के साथ व्यापार की आक्रामक रणनीति ने न केवल चिंताएं बढ़ाई हैं, बल्कि कई देशों में तो बाजार में उसकी पैठ सीमित करने लिए आंदोलन तक खड़े होने लगे हैं।

हमारे देश के खिलाफ समय-समय पर अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने वाले चीन को आर्थिक रूप से क्षति पहुंचाना बहुत जरूरी है। ऐसे में, चीन की तकनीक और उसके सामान का बहिष्कार जरूरी है। भारत को चीन के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को सीमित करने की शुरुआत करनी होगी, यद्यपि यह पूरी तरह से खत्म नहीं किए जा सकते। गत दिनों मोदी सरकार ने एक बार फिर उसके कई एप पर पाबंदी लगाकर इस दिशा में कदम उठाया है। सरकार का यह प्रयास नागरिकों के सहयोग के बिना कामयाब नहीं हो सकता।