बरेली: उपनिबंधक से रंगदारी मांगने का आरोपी आईटीआई छात्र गिरफ्तार
बरेली,अमृत विचार। उपनिबंधक द्वितीय से वॉट्सएप नंबर से 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगने के आरोपी आईटीआई छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने उपनिबंधक का नंबर ऑनलाइन सर्च किया था और पैसा कमाने के लिए रंगदारी मांगी थी। उसने रकम डालने के लिए अपने दोस्त का अकाउंट नंबर भेजा था। पुलिस ने …
बरेली,अमृत विचार। उपनिबंधक द्वितीय से वॉट्सएप नंबर से 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगने के आरोपी आईटीआई छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने उपनिबंधक का नंबर ऑनलाइन सर्च किया था और पैसा कमाने के लिए रंगदारी मांगी थी। उसने रकम डालने के लिए अपने दोस्त का अकाउंट नंबर भेजा था। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से उसे ट्रेस किया। उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उसके पास से दो फोन भी बरामद किए हैं।
बता दें कि 1 दिसंबर को रजिस्ट्री ऑफिस के उपनिबंधक द्वितीय राकेश कुमार गौतम के वॉट्सएप नंबर पर एक मैसेज आया था। मैसेज करने वाले ने लिखा कि तुरंत 50 हजार रुपए जमा कर दो नहीं तो शाम तक जिंदा नहीं रहोगे। उसने मैसेज में एक बैंक अकाउंट नंबर भी भेजा था। राकेश कुमार ने तुरंत कोतवाली पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी। पुलिस ने जिस नंबर से रंगदारी मांगी उसे ट्रेस किया तो वह भरतौल के फौजी परमेश्वरी लाल के नाम पर निकला।
पुलिस ने परमेश्वरी लाल से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा केशव फोन चला रहा था। जब केशव से पूछा तो उसने बताया कि उसने सिम अपने दोस्त कुलदीप निवासी नगी रामपुर भुता को इस्तेमाल के लिए दिया था। जब पुलिस ने कुलदीप से पूछा तो पता चला कि सिम 6 महीने पहले गिर गया था।
इसके बाद पुलिस ने सीडीआर खंगाली तो बीसलपुर के किसनी निवासी विकास व सिसईया निवासी विपिन से बात की तो उन्होंने बताया कि यह नंबर विकास भारती पुत्र अनोखेलाल निवासी सिसइया बीसलपुर चलाता है। जिस फोन का ईएमआई आया वह बेसिक फोन था जबकि मैसेज वॉट्सएप पर भेजा गया था। पुलिस ने जब विकास को पकड़ा तो पता चला कि विकास सिम का इस्तेमाल बेसिक फोन में कर रहा था लेकिन उस नंबर से वॉट्सएप दूसरे एंड्रायड फोन में चला रहा था। इसके बाद पुलिस ने विकास को गिरफ्तार कर लिया।
विकास ने बताया कि वह भुता में किराये पर रहता है। वह एक निजी महाविद्यालय से आईटीआई कर रहा है। वह ऑनलाइन अधिकारियों के नंबर सर्च कर रहा था जिसके जरिए उसे कई नंबर मिल गए। उसने नंबरों को ट्रूकालर पर चेक किया तो उपनिबंधक का नंबर मिल गया। इसके बाद उसने रुपये कमाने की सोची।
उसने वॉट्सएप नंबर से मैसेज भेज दिया, जिसमें शाहजहांपुर निवासी अपने दोस्त का बैंक अकाउंट नंबर डाल दिया। उसका दोस्त लॉकडाउन से पहले उसके साथ भुता में ही किराये पर रहता था। उसने सोचा था कि वह रंगदारी मांगेग तो डर के चलते अधिकारी कुछ रकम अकाउंट में डाल देंगे और वह पकड़ा नहीं जाएगा लेकिन उसे यह उम्मीद नहीं थी कि मामला इतना बड़ा हो जाएगा।
