पर्यावरण के हित में
उच्चतम न्यायालय ने एक प्रेरणादायक बात कही है कि सड़क बनाने के लिए पेड़ नहीं काटे जाएंगे। हां, आप चाहो तो सड़क को थोड़ा घुमा लो ताकि पेड़ बचे रहें। सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण गोवर्धन रोड प्रोजेक्ट के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि पेड़ों को काटकर सड़कों को सीधा क्यों बनाए …
उच्चतम न्यायालय ने एक प्रेरणादायक बात कही है कि सड़क बनाने के लिए पेड़ नहीं काटे जाएंगे। हां, आप चाहो तो सड़क को थोड़ा घुमा लो ताकि पेड़ बचे रहें। सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण गोवर्धन रोड प्रोजेक्ट के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि पेड़ों को काटकर सड़कों को सीधा क्यों बनाए जाए? ताज संरक्षित क्षेत्र के मथुरा में श्रीकृष्णा गोवर्धन सड़क परियोजना के लिए सड़क के लिए तीन हजार पेड़ काटने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के सामने यह सवाल रखा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ हजारों पेड़ों को काटने की अनुमति के लिए एक अर्जी पर सुनवाई कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को लिए पेड़ों के कटान को लेकर चिंता व्यक्त की।
सीजेआई बोबडे ने यूपी सरकार से कहा कि जीवित पेड़ों का मूल्यांकन केवल लकड़ी के मूल्य के आधार पर नहीं किया जा सकता है। पेड़ ऑक्सीजन देते हैं, इसे भी मूल्यांकन में शामिल किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि पीडब्ल्यूडी ने आश्वासन दिया है कि वे उसी पेड़ को दूसरे क्षेत्र में लगाकर क्षतिपूर्ति करेंगे ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।
हमारे लिए केवल अंकगणितीय शब्दों में एक मुआवजे को स्वीकार करना संभव नहीं है, खासकर जब उत्तर प्रदेश या पीडब्ल्यूडी की ओर से पेड़ों की प्रकृति के बारे में कोई बयान नहीं आता है कि उन्हें झाड़ियों या बड़े पेड़ों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसके अलावा पेड़ों की उम्र के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि प्रतिपूरक वनीकरण नहीं किया जा सकता है। क्या 100 साल पुराने पेड़ को काट दिया जाए?
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से से दो हफ्ते में हजारों पेड़ों की प्रकृति और संख्या का पता लगाने के लिए जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट मामले में अब चार हफ्ते बाद सुनवाई करेगा।
पेड़ काटने को लेकर यह पहली बार नहीं है जब न्यायालय ने ऐसी संवेदनशीलता दिखाई है। पहले भी न्यायालय से पेड़ों के अंधाधुंध कटान को लेकर टिप्पणी और निर्णय किए गए हैं। जहां तक जनपयोगी और विकासपरक परियोजनाओं की बात है उनके कार्यों में आड़े आने वाले पेड़ों का कटान करने के निर्णय लिए जाते रहे हैं लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों के कटान को लेकर ऐसा सुझाव दिया है, जिस पर यदि अमल किया गया तो नि:संदेह इससे न सिर्फ पेड़ों को बचाया जा सकेगा बल्कि ऐसा करना भविष्य के लिए नजीर भी बन सकेगा।
