अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर का इलाका नो ड्रोन जोन घोषित
अयोध्या, अमृत विचार। राम जन्मभूमि परिसर का इलाका नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है। प्रदेश शासन को आशंका है कि असामाजिक तत्व मंदिर निर्माण के दौरान हमला कर सकते हैं अथवा खलाल डाल सकते हैं। इसको लेकर प्रदेश शासन ने जिला मजिस्ट्रेट से राम जन्मभूमि परिसर क्षेत्र में ड्रोन अथवा हवा में उड़ने …
अयोध्या, अमृत विचार। राम जन्मभूमि परिसर का इलाका नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है। प्रदेश शासन को आशंका है कि असामाजिक तत्व मंदिर निर्माण के दौरान हमला कर सकते हैं अथवा खलाल डाल सकते हैं। इसको लेकर प्रदेश शासन ने जिला मजिस्ट्रेट से राम जन्मभूमि परिसर क्षेत्र में ड्रोन अथवा हवा में उड़ने वाले सभी प्रकार के यंत्रों पर पाबंदी की मांग की थी। सोमवार को जिला मजिस्ट्रेट ने राम जन्मभूमि परिसर का इलाका नो ड्रोन जोन घोषित किया है।
जिला मजिस्ट्रेट की ओर से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि 20 नवंबर 20 को मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में शासन में आयोजित बैठक में विचार विमर्श के बाद राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के लिए परिसर के आसपास एंटी डॉन निषेधाज्ञा जारी किए जाने की मांग की गई थी। वर्तमान में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है जिसके चलते परिसर की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता बढ़ गई है।
तमाम न्यूज़ चैनल लगातार परिसर के अंदर हो रही गतिविधियों की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी करने का प्रयास किया करते हैं। मीडिया की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है। आशंका है कि मीडिया की आड़ में शरारती तत्व ड्रोन का इस्तेमाल कर राम जन्मभूमि क्षेत्र में किसी अपनी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस बाबत जनपद पुलिस प्रमुख की ओर से पत्र भेजा गया है।
ऐसे में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 में भी अधिकारों का प्रयोग करते हुए लोन शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर किसी व्यक्ति, संगठन, संस्था आदि की ओर से सक्षम मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहन, ऐसे सदृश्य उड़ने वाले उपकरण, जिनके माध्यम से शूटिंग, सर्वे एवं हथियारों का प्रयोग किया जा सकता है, का संचालन एवं परिचालन पूर्णता प्रतिबंधित किया जाता है। यह प्रतिबंध पुलिस विभाग पर लागू नहीं होंगे और 2 फरवरी 2020 तक लागू रहेंगे। इस आदेश अथवा इसके किसी भी अंश का उल्लंघन भारतीय दंड विधान की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध होगा।
जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह आदेश तात्कालिक रूप से पारित करने की आवश्यकता थी। ऐसी दशा में समय अभाव के कारण समस्त संबंधित को समय से सूचित कर किसी पक्ष को सुना जाना संभव नहीं था। इसलिए आदेश एकपक्षीय रूप से जारी किया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति, संस्था को इस आदेश से आपत्ति हो तो इस संबंध में वह आपत्ति, आवेदन रेजीडेंट मजिस्ट्रेट अयोध्या, अपर जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) अथवा संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष दे सकता है।
