आंदोलन के सवाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत अब तक बेनतीजा रही है। लगता है अभी बातचीत के जरिये किसानों और सरकार के बीच लंबा रास्ता तय होना है। अब अगली बैठक बुधवार को होगी। सरकार का रुख भी आंदोलन के प्रति शत्रुतापूर्ण नहीं है। लग रहा …

कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत अब तक बेनतीजा रही है। लगता है अभी बातचीत के जरिये किसानों और सरकार के बीच लंबा रास्ता तय होना है। अब अगली बैठक बुधवार को होगी। सरकार का रुख भी आंदोलन के प्रति शत्रुतापूर्ण नहीं है। लग रहा है कि तीनों ही कानून को रद तो शायद नहीं किया जा सकेगा लेकिन किसानों की जायज मांगों के मान लिए जाने का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार किसानों की शंकाओं का समाधान करेगी तभी तो बुधवार को होने वाली अगले दौर की बैठक के लिए किसान प्रतिनिधियों से सुझाव देने का आग्रह किया गया है।

उधर, कृषि कानूनों को वापस लेने पर अड़े किसान संगठनों के मंगलवार के भारत बंद को लेकर तमाम विपक्षी दल, विभिन्न गैर राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन एक साथ खड़े हैं। ऐसे में सड़क और रेल परिचालन को बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। चक्का जाम करने से आखिरकार दिक्कतें जनता को ही होंगी। हालांकि आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इस बंद से अलग रहने की घोषणा की है।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बता रही है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने किसान आंदोलन पर कहा कि किसानों से संबंधित सुधारों के लिए जो कानून बने हैं, उसको लेकर कुछ किसान संगठनों ने जो शंका उठाईं हैं, उसके लिए चर्चा हो रही है, चर्चा की अपनी प्रक्रिया है जो सरकार कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि एमएसपी जारी रहेगी, इस पर कोई खतरा नहीं है, इसलिए किसी प्रकार की शंका करना बेबुनियाद है। केंद्र सरकार ने रविवार को साफ कर दिया कि तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे। हालांकि कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने यह जरूर कहा कि आश्यकता होने पर इन कानूनों में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।

दूसरी ओर सोमवार को उत्तर प्रदेश में सरकार के कड़े तेवर भी दिखे। सपा और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को नजरबंद इसी कड़ी में किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बंद पर कड़े तेवर दिखाए हैं। इससे टकराव की नौबत बनती दिख रही है। यह स्थिति किसी भी तरह से सही नहीं है। विपक्ष को सरकार के खिलाफ खड़े होने का लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरा अधिकार है और सरकार को भी विपक्ष की जायज आवाज को दबाना नहीं चाहिए लेकिन सबको यह भी सोचना होगा कि उनके किसी भी कदम से आम जनता के सामने मुश्किलें खड़ी न होने पाएं।