Janmashtami 2025: नंद के घर आनंद भयो... मनमोहक कृष्ण का हुआ जन्म, हर घर में उत्सव की बधाई; देखे Photos
मथुरा, अमृत विचारः भक्तगण अपने प्रिय भगवान के जन्म के क्षण की प्रतीक्षा में शनिवार की मध्यरात्रि को उत्साह और भक्ति में डूबे रहे, नजरें घड़ी पर टिकी थीं। जैसे ही रात के 12 बजे, भाद्रपद की अंधेरी अष्टमी तिथि पर ब्रज में कन्हैया का जन्म हुआ, लाखों श्रद्धालुओं ने इस पवित्र क्षण का साक्षात्कार किया।
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भक्तों का उत्साह ऐसा था मानो ब्रज द्वापर युग की उस अलौकिक छटा में लौट आया हो। उस आनंदमयी पल से कोई बाहर निकलने को तैयार न था। कन्हैया की चौखट पर उमड़ा भक्तों का समुद्र और उनकी आंखों से छलकते भावनाओं के आंसू अविस्मरणीय थे। प्रभु के जन्म के साथ ही ब्रज का हर कण पवित्र हो उठा।
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कान्हा के जन्म के समय मंत्रों की गूंज और शंखनाद से ब्रज की हर डाल, हर पत्ती झूम उठी। गोकुल सहित समस्त ब्रज के मंदिरों में "प्रकट हुए गोपाला" और बधाई गीतों से भक्ति का माहौल बन गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर माहौल इतना मनमोहक था कि जब घड़ी ने रात 11 बजे का संकेत दिया, तब श्रीगणेश और नवग्रह स्थापना के साथ पूजन शुरू हुआ।
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रात 11:55 तक कमल पुष्प और तुलसीदल से सहस्रार्चन संपन्न हुआ। अब बस 5 मिनट शेष थे। हर भक्त अपने लाडले कन्हैया के आगमन के लिए व्याकुल था। ठीक 11:59 पर युगल सरकार के पट बंद हुए, और उस एक मिनट में भक्तों को लगा जैसे युग बीत रहे हों।
रात 12 बजे लीलाधारी की चल विग्रह को भागवत भवन में लाया गया। यहां रजत कमल पर विराजित भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने 100 किलो की सोने-चांदी की कामधेनु प्रतिमा में गंगाजल और पंचामृत से किया।
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इस अलौकिक क्षण में भक्तों का उत्साह चरम पर था। जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़ों, घंटों और घड़ियालों की ध्वनि गूंज उठी। झांझ, मजीरे, मृदंग और शंख की मंगल ध्वनियों के बीच कन्हैया के बधाई गीत गूंजने लगे। दर्शन का सिलसिला रात 1:30 बजे तक चला, जिसमें भक्त "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयकारों के साथ नाचते-गाते रहे।
कान्हा को पंजीरी और पाग का लगा भोग, व्रत का समापन
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्तों ने शनिवार को पूरे विधी विधान से व्रत रखा और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। लड्डू गोपाल को सुबह स्नान कराकर नई वेशभूषा और मुकुट पहनाया गया। घर-घर में मंदिरों को सजाया गया और लल्ला के लिए खिलौने भी रखे गए। विधिवत पूजा-अर्चना के साथ दिनभर व्रत रखा गया।
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मध्यरात्रि 12 बजे शंखनाद के बीच घरों में कान्हा का जन्मोत्सव मनाया गया। भक्तों ने पहले माखन-मिश्री, पंजीरी और पाग का भोग लगाया, फिर व्रत खोला। पाग बनाने के लिए चीनी की चाशनी में खोया और सूखे मेवे डाले गए। घरों में स्वादिष्ट व्यंजन और मिठाइयां तैयार की गईं।
