UP : पहले बचाया, फिर दबाव में झुकी पुलिस, एसएसबी ने कराई FIR
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। आर्मी और एसएसबी जवान बनकर नेपालियों से लूट व वसूली करने वाले आरोपियों को बचाने में जुटी तिकुनिया पुलिस अब पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। पहले पुलिस ने सबूत और तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर दोनों आरोपियों का चालान महज शांति भंग में कर दिया, लेकिन एसएसबी के सख्त तेवर देख आखिरकार सोमवार देर शाम रिपोर्ट दर्ज करनी ही पड़ी। इस घटनाक्रम ने पुलिस की नीयत और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत नेपाल सीमा पर आर्मी लिखी बाइक सवार तीन युवकों का गैंग कई सालों से सक्रिय था। खुद को एसएसबी जवान, कभी अधिकारी बताकर नेपाली नागरिकों से लूटपाट और अवैध वसूली करते थे। रविवार को भी आर्मी बाइक सवार तीन युवकों ने गांव मुजहा के पास दिनदहाड़े दोपहर में दो नेपाली नागरिकों से सात हजार रुपए लूट लिए थे। नेपालियों के शोर मचाने पर ग्रामीणों ने कोतवाली तिकुनिया के गांव तकियापुरवा निवासी वसीम पुत्र डॉ इदरीश और इदरीश को घेर कर बाइक समेत पकड़ लिया था। गुस्साए ग्रामीणों ने दोनों को बांधकर जमकर पिटाई की थी और तिकुनिया पुलिस को सौंप दिया था। शुरुआत से ही बचाव की कोशिश
ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी खुलेआम खुद को एसएसबी का जवान बताकर नेपालियों से उगाही करते रहे, लेकिन पुलिस पूरे मामले को हल्के में लेकर लीपापोती करती रही। तिकुनिया पुलिस का रवैया ऐसा था मानो वह आरोपियों को बचाने में लगी हो। पुलिस ने लूट और वसूली की बात को सिरे से खारिज कर दिया था और शांतिभंग के आरोप में चालान कर अपने मंसूबों को पूरा कर लिया। एसएसबी तृतीय वाहिनी एसएसबी निरीक्षक अर्चित तिवारी की ओर से लिखित तहरीर आने के बाद पुलिस की मजबूरी बढ़ी और उसे बीएनएस की धारा 308 (2) और 319 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज करना पड़ा। यह कदम पुलिस की पूर्व कार्यवाही पर सवालिया निशान खड़ा करता है कि अगर एसएसबी दबाव न बनाता तो क्या यह मामला सिर्फ शांति भंग तक ही सीमित रह जाता?
लापरवाही है या फिर आरोपियों से सांठगांठ
एसएसबी निरीक्षक अर्पित तिवारी की ओर से तहरीर मिलने पर मजबूरी में पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करना पड़ा। सवाल यह है कि जब केंद्रीय बल खुद शिकायत दे रहा था, तो पुलिस क्यों बार-बार सबूत न मिलने की कहानी गढ़ रही थी? यह महज लापरवाही है या फिर आरोपियों से सांठगांठ?
भरोसे पर पड़ा सवालिया निशान
एसएसबी की सख्ती से तो आरोपी कानून के शिकंजे में आ गए, मगर तिकुनिया पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। लोगों का कहना है कि अगर एसएसबी दबाव न डालता तो यह मामला सिर्फ शांति भंग तक ही सीमित रह जाता। पुलिस जिस तरह पहले बचाव कर रही थी, उससे साफ है कि कहीं न कहीं मिलीभगत की बू आती है। अब देखना यह है कि पुलिस वास्तव में आरोपियों पर कड़ा शिकंजा कसती है या फिर औपचारिक कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर देती है।
एसएसबी ने एफआईआर में कही यह बड़ी बात
एसएसबी तृतीय वाहिनी की ओर से दी गई तहरीर में साफतौर पर कहा गया है कि कुछ व्यक्ति संगठन की छवि खराब करने के साथ ही स्थानीय लोगों से अनुचित लाभ के लिए वसूली कर रहे हैं। इसमें दो व्यक्तियों वसीम पुत्र इदरीश निवासी बाजपुरवा और मोहम्मद इदरीस पुत्र जलील और एक अज्ञात व्यक्ति है।
