शब्द रंग : 81 साल में भी कैनवास के कुशल चितेरे
कला जीवंत है। बचपन में मां से ऐसी प्रेरणा मिली कि जीवन को कला के लिए समर्पित कर दिया और आज भी बच्चों और बड़ों के जीवन में रंग भर रहे हैं, 1995-96 में राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत चित्रकार डॉ. महेंद्र कुमार सक्सेना।
उनके शब्दों में बचपन में कला के प्रति सजगता देख मां बसंती देवी मुझसे जन्माष्टमी, करवाचौथ, भइया दूज, अहोई अष्टमी के चित्र दीवारों पर बनवाकर पूजा करती थीं। यहीं से कला में रुचि बढ़ी और पहली शिक्षिका मां बनीं। इसके बाद बड़े भाई चित्रकार सुरेन्द्र कुमार सक्सेना से कला की बारीकियां सीखीं। दीपिका चित्रकला केंद्र से कला की शिक्षा ग्रहण करने के बाद बरेली से लेकर नैनीताल, देहरादून तक कला के रंग बिखेरे। पेशेवर कला की शुरुआत गुरु जगदीश आर्य के साथ नैनीताल के माल रोड पर लोगों के स्केच बनाकर हुई। लीलावती पंत राजकीय इंटर कॉलेज, भीमताल में कला अध्यापक के बाद राजकीय इंटर कॉलेज गंगोलीहाट, (पिथौरागढ़) पहुंचा। ज्वालामुखी, हरिद्वार में राजकीय दीक्षा विद्यालय में शिक्षण कार्य के बाद बरेली के मनोहर भूषण इंटर कॉलेज आया तो प्रबंध समिति के लोगों ने मुझसे कहा, अपनी पेंटिंग दिखाओ।
इस पर मैंने जवाब दिया, पेंटिंग तो किसी से बनवाकर ला सकता हूं। यहीं पर कुछ बनवा लीजिए। दो मिनट में स्केच बना दिया। कला अध्यापक के रूप में नियुक्ति होने पर ड्राइंग एवं पेंटिंग में एमए की डिग्री ली। इसके बाद अपने गुरु प्रो. रणवीर सक्सेना एवं डॉ. सरला रमण अध्यक्ष, चित्रकला विभाग डीएवी कॉलेज देहरादून के सानिध्य में हेमवती नंदा बहुगुणा विश्व विद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि ली। 1974 में उप्र कला परिषद का गठन हुआ। इसमें छात्र-छात्राओं को होनहार कलाकार बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रतियोगिता कराने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से सराहना मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 34 पोट्रेट की प्रदर्शनी
वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके जीवन के बाल्यकाल से लेकर अभी तक के पोट्रेट की सीरीज में 34 चित्र बनाए हैं, जिनकी प्रदर्शनी लगाने की तैयारी है।
स्केच बनाकर हर नेता से ऑटोग्राफ लिए
इंदिरा गांधी, एचडी देवगौड़ा, राजनाथ सिंह, हेमवती नंदन बहुगुणा, कमलापति त्रिपाठी, केसी पंत, सुचेता कृपलानी, मोरार जी देसाई, वीरेंद्र सिंह, लक्ष्मी शंकर यादव, जगदीश शरण अग्रवाल, जग जीवन राम के स्केच बनाए और उनके ऑटोग्राफ भी लिए।
275 मीटर लंबी पेंटिंग पर मिला राष्ट्रपति पुरस्कार
वर्ष 1994-95 में 14 दिन-रात परिश्रम करके 275 मीटर लंबी पेंटिंग बनाई। विषय था 'आजादी के बाद से अब तक शिक्षकों का इतिहास'। इस पेंटिंग पर 1995-96 में राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया।
लेखक:डॉ. महेंद्र कुमार सक्सेना।
