2020 में कोरोना ने छीन लिया एक और सितारा, नहीं रहे प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार मंगलेश डबराल
नई दिल्ली। साल 2020 भारत समेत पूरे विश्व के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं रहा है। इस साल जानलेवा वायरस कोरोना ने एक वक्त पर तो सब कुछ रोक देने पर मानव सभ्यता को विवश कर दिया था। कोरोना के कारण 2020 में कई महान हस्तियों का निधन भी हुआ। इसी कड़ी में अब …
नई दिल्ली। साल 2020 भारत समेत पूरे विश्व के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं रहा है। इस साल जानलेवा वायरस कोरोना ने एक वक्त पर तो सब कुछ रोक देने पर मानव सभ्यता को विवश कर दिया था। कोरोना के कारण 2020 में कई महान हस्तियों का निधन भी हुआ। इसी कड़ी में अब मंगलेश डबराल के रुप में एक और नाम जुड़ गया है। प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार मंगलेश डबराल अब नहीं रहे। कोरोना की चपेट में आने के बाद उन्हें पहले तो गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार ना होने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। मंगलेश डबराल ने अपनी अंतिम सांस एम्स में ही ली। उनके जाने से साहित्य समेत पत्रकारिता के क्षेत्र में भी एक गहरा शून्य व्याप्त हो गया है जिसे भर पाना अब शायद संभव ना हो सके।
मंगलेश डबराल के बारे में कुछ खास बातें
दिल्ली में कई जगह काम करने के बाद मंगलेश डबराल ने मध्यप्रदेश का रूख किया। भोपाल में वह मध्यप्रदेश कला परिषद भारत भवन से प्रकाशित होने वाले साहित्यिक त्रैमासिक पूर्वाग्रह में सहायक संपादक रहे। उन्होंने लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अमृत प्रभात में भी कुछ दिन नौकरी की। वर्ष 1963 में उन्होंने जनसत्ता में साहित्य संपादक का पद संभाला। उसके बाद कुछ समय तक वह सहारा समय में संपादन कार्य में लगे रहे। आजकल वह नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े हुए थे।
मंगलेश डबराल के पांच काव्य संग्रह (पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज भी एक जगह है और नये युग में शत्रु) प्रकाशित हुए हैं। मंगलेश डबराल मूलरूप से उत्तराखंड के निवासी थे। उनका जन्म 14 मई 1949 को टिहरी गढ़वाल, के काफलपानी गांव में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में ही हुई थी। मंगलेश डबराल के यूं चले जाने पर पत्रकारिता और साहित्य जगत से जुड़े हुए लोग उन्हें अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
हिंदी साहित्य की दुनिया सदमे में। कवि लेखक चिंतक मंगलेश डबराल नहीं रहे। जनांदोलनों के साथ वो अंत समय तक खड़े रहे। किसानों के संघर्ष के लिए आवाज़ उठाते रहे। एक अदम्य जीवट और बेमिसाल वैचारिकी वाला मनुष्य हमारे बीच से चला गया। कविता का संसार स्तब्ध है। उनकी जगह भरी नहीं जा सकेगी। श्रद्धांजलि।– नवीन कुमार
आखिरकार कवि मंगलेश डबराल को भी कोरोना लील गया। मित्र असद ज़ैदी ने कुछ देर पहले ही अपनी वाल पर यह खबर दी है। मंगलेश जी को आज शाम ही दो बार दिल का दौरा पड़ा था।-देवप्रिय अवस्थी
यह क्या सुन रहा हूँ? दिल का -कोना-कोना रोज दरक रहा है। एक और दरक गया। हमारी आंखों के सामने से एक चलता-फिरता जुझारू कवि, चला गया। सब रूठे चले जा रहे हैं? ये बुरे दिन, तेरी क्षय हो। नमन!नमन!!– सुभाष चन्द्र कुशवाहा
