मुरादाबाद: नौकरी छोड़ मशरूम की खेती कर रहा इंजीनियर
मुरादाबाद,अमृत विचार। लगभग छह साल पहले एक इंजीनियर ने पंजाब की एक बड़ी कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद को छोड़कर कुछ अलग करने की सोची। उसकी अलग सोच ने उसे आज एक किसान के साथ-साथ विदेश में मशरूम निर्यात करने वाला निर्यातक भी बना दिया। वह इंजीनियर आज मशरूम की खेती करके तीन से …
मुरादाबाद,अमृत विचार। लगभग छह साल पहले एक इंजीनियर ने पंजाब की एक बड़ी कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद को छोड़कर कुछ अलग करने की सोची। उसकी अलग सोच ने उसे आज एक किसान के साथ-साथ विदेश में मशरूम निर्यात करने वाला निर्यातक भी बना दिया। वह इंजीनियर आज मशरूम की खेती करके तीन से चाल लाख सालाना तक मुनाफा कमाता है और उसके मशरूम दुबई व बांग्लादेश भी निर्यात होते हैं।
जनपद के बिलारी तहसील क्षेत्र के गांव पहाड़पुर निवासी गोपाल सिंह वैसे तो इंजीरियर हैं। उन्होंने काफी समय पहले पंजाब की एक केमिकल फैक्ट्री में काम किया है, लेकिन गोपाल सिंह का नौकरी में मन नहीं लगा। मन न लगने पर इंजीनियर गोपाल गांव लौट आये। कुछ दिन तक खाली समय बिताने के बाद इंजीनियर ने कुछ अलग करने की सोची। इसके बाद उनके दिमाग में मशरूम की खेती करने का ख्याल आया।
इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती करने की ट्रेनिंग ली। कुछ अलग करने की सोच ने गोपाल को मशरूम की खेती करने का एक अच्छा किसान बना दिया। गोपाल पिछले छह सालों से मशरूम की खेती कर रहे हैं। मशरूम की खेती करने में इंजीनियर गोपाल सिंह का नाम अच्छे किसानों में आता है। गोपाल सिंह अपने देश के साथ-साथ दुबई व बांग्लादेश में भी मशरूम निर्यात कर रहे हैं। इंजीनियर ने बताया कि हर नया काम करने में रिस्क लेना होता है, लेकिन रिस्क ही हमें एक बड़े मुकाम तक पहुंचाता है। मेरे लिए भी यह रिस्क की बात थी कि मैंने पंजाब की एक बड़ी कंपनी से मैकेनिकल इंजीनियर का पद छोड़कर कर गांव लौटकर मशरूम की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने इस काम को पांच हजार रुपये से शुरू किया था।
अब इस काम में उन्हें तीन से चार लाख सालाना आमदनी हो जाती है। गोपाल अपने मशरूम को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, उड़ीसा व असम के अलावा दुबई व बांग्लादेश में भी बेच रहे हैं।
दो तरह के मशरूम उगाते हैं
इंजीनियर से किसान निर्यात बने पहाड़पुर गांव के रहने वाले गोपाल सिंह दो तरह के मशरूम की खेती करते हैं, जिसमें पहला बटन मशरूम है, इसका इस्तेमाल खाने में किया जाता है। जबकि दूसरी वैराइटी आस्टर मशरूम है, जिसका इस्तेमाल सब्जियों के साथ ही फार्मेसी कंपनियों में होता है, जिससे दिल और शुगर की दवाइयां भी बनती हैं।
मुरादाबाद में 50 से 60 किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। मशरूम की खेती पर अनुदान की सुविधा नहीं है, लेकिन यह लाभकारी खेती है। यह कम लागत में जल्दी तैयार हो जाती है, जिसमें मुनाफा भी अच्छा हो जाता है। कई किसान तो विदेशों और दूसरे राज्यों तक अपने माल की सप्लाई कर मुनाफा कमा रहे हैं। – सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
