निर्यात को रफ्तार देगी प्रदेश की नई प्रोत्साहन नीति: निर्यातकों के लिए बढ़ी सुविधाएं और अनुदान

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Edited By Anjali Singh
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प्रशांत सक्सेना/लखनऊ, अमृत विचार : उप्र निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 निर्यात को और रफ्तार देगी। लागू नई नीति में विपणन विकास सहायता योजना (एमडीए) के तहत उत्पाद पर दिया जाने वाला वार्षिक खर्च 16.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया गया है। निर्यातकों को देश-विदेश में उत्पाद के स्टॉल, फेयर या डेमो करने पर जो खर्च आएगा उसका 75 फीसद अनुदान (उपादान) मिलेगा। यह धनराशि अधिकतम 7,500 रुपये तक होगी।

निर्यातकों को फायदा पहुंचाने के लिए उत्पाद की सैंपलिंग, परिवहन लागत, बाजार विकास, जीआई प्रमाणन, प्रचार आदि पर जो खर्च आएगा उस पर 75 फीसद तक वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे पहले उप्र निर्यात प्रोत्साहन नीति 2020-25 में अनुदान 50-60 फीसद तक ही मिलता था। इसके अलावा नई नीति में ऑन बोर्डिंग कास्ट यानी निर्यात की शुरुआत करने में पंजीयन, कागजी प्रक्रिया समेत जो भी शुल्क लगेगा उस पर अधिकतम तीन लाख रुपये (75 फीसद) धनराशि सिर्फ एक बार दी जाएगी। पिछले नीति और निर्यात में आने वाली समस्याओं को देखते हुए कई बदलाव करके निर्यातकों की सुविधाएं और अनुदान में वृद्धि की गई है। इस पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो ने काम शुरू कर दिया है।

छोटे निर्यातकों को भी मिलेगी राहत

नवीन निर्यात नीति में छोटे निर्यातकों का विशेष ध्यान रखा गया है। जो अब जितना उत्पाद कंटेनर से भेजेंगे उन्हें भी बढ़े निर्यातकों की तरह गेटवे के तहत शिपिंग शुल्क में राहत मिलेगी। इसके अलावा ओडीओपी से जो उत्पाद आच्छादित नहीं होते हैं लेकिन उनके निर्यात की संभावना अधिक होने पर 15 करोड़ तक की सीएफसी की स्थापना के लिए सहायता दी जाएगी।

50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य

- प्रदेश के निर्यात को वित्तीय वर्ष 2024 में 21 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर से बढ़ाकर वर्ष 2030 में 50 बिलियन डॉलर के स्तर को प्राप्त करना सरकार का मकसद है। इसे बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, डिजिटल कैटलॉगिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग पर होने वाले व्यय को नई प्रति में प्राथमिकता दी गई है।

निर्यातकों को ये मिलेंगे नये फायदे

इंफ्राटक्चर यानी प्रोजेक्ट का अधितम 10 करोड़ (40 फीसद)

बीमा के प्रीमियम पर अधिकतम पांच लाख रुपये (30 फीसद)

बेहतर परफार्मेंस में गेटवे पर अधिकतम 20 लाख रुपये (1 फीसद)

डाक से पोस्ट करने पर अधिकतम 1 लाख रुपये (75 फीसद)

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