Moradabad : लापरवाही पर जिला प्रोबेशन अधिकारी जनपद से रिलीव
मुरादाबाद, अमृत विचार। विकास भवन सभागार में शुक्रवार को आयोजित मासिक विकास समीक्षा बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण की अनुपस्थिति पर डीएम अनुज सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें जनपद से रिलीव करने का निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिया। चंद्रभूषण की मूल तैनाती संभल जिले में है और उन्हें शासन द्वारा मुरादाबाद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि चंद्रभूषण को हर सप्ताह बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को मुरादाबाद में मौजूद रहकर विभागीय कार्यों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए थे। विभागीय योजनाओं की कमजोर प्रगति और बैठक से अनुपस्थिति उनकी गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को भी सख्त निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर कराए जाने वाले सभी कार्यों में वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन हो। उन्होंने चेतावनी दी कि ग्राम प्रधानों को किसी भी सरकारी योजना से संबंधित धनराशि अपने निजी खाते में रखने का अधिकार नहीं है और ऐसा करना वित्तीय अनियमितता व सरकारी धन के दुरुपयोग के अंतर्गत आएगा।
बैठक में जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग, कृषि रक्षा रसायन, पीएम-कुसुम योजना, बीज डीबीटी, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), दुग्ध मूल्य भुगतान, दिव्यांगजन पेंशन, गन्ना मूल्य भुगतान, सहायक उपकरण वितरण, आबकारी, ओडीओपी, कन्या विवाह सहायता योजना और आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण सहित कई योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की।
गोशालाओं को काऊ-बेस्ड फार्मिंग हब के रूप में विकसित करें
डीएम ने उप निदेशक कृषि और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि जिले की गोशालाओं को काऊ-बेस्ड फार्मिंग हब के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में एकत्र गोबर और गोमूत्र से आधुनिक तकनीक के आधार पर जैविक उर्वरक तैयार कराए जाने की बात पर जोर दिया है। इसके साथ ही गोशालाओं के आसपास खेती करने वाले किसानों को जैविक उर्वरक के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाने को कहा।
लाभार्थियों को करें प्रशिक्षित
जिलाधिकारी ने जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी से न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित कैंपों में चिन्हित दिव्यांगजनों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सहायक उपकरण उपलब्ध कराते समय उनके सही उपयोग के बारे में लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि दिव्यांगजन इन उपकरणों का अधिकतम लाभ उठा सकें।
