आधार में अब नहीं जाएगा केयर ऑफ, माता-पिता या पति के नाम में संशोधन को न लगाएं दौड़... यूआईडीएआई ने नियमों में किया बदलाव
लखनऊ। मैडम! हमारी पत्नी के आधार कार्ड में केयर ऑफ में उनके पिता की जगह मेरा नाम करवाना है...। भैया, हमारे आधार कार्ड में केयर ऑफ के सामने लिखे पिता के नाम में कुछ संशोधन कराना है...। हजरतगंज में स्थित रतन स्क्वायर के आधार केंद्र पर हर दिन प्रदेश भर के जिलों से सैकड़ों लोग इसी काम के लिए पहुंचते हैं।
घंटों परेशान होने के बाद जब लोग आधार केंद्र के स्टाफ तक पहुंचते हैं तो पता चलता है कि नए नियम के तहत आधार कार्ड में केयर ऑफ का कॉलम खत्म कर दिया गया है, नए बनने वाले या संशोधित होने वाले आधार में अब केयर ऑफ का कॉलम नहीं होगा।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सभी कामन सर्विस सेंटर को एक सर्कुलर जारी कर 15 अगस्त 2025 के बाद बनने वाले या संशोधित होने वाले आधार कार्ड में केयर ऑफ का कॉलम खत्म कर दिया है। अब केवल कार्ड धारक का नाम, उम्र और पता ही दर्ज किया जाएगा।
नए नियम के तहत अब HOF (हेड ऑफ फैमिली) यानी (परिवार के मुखिया) आधारित एनरोलमेंट/संशोधन की स्थिति में ही िकसी व्यक्ति के आधार में केयर आॅफ के सामने परिवार के मुखिया का नाम स्वत: ही जोड़ा जाएगा। लेकिन इसके लिए मुखिया का आधार नंबर और सहमति चाहिए होगी। खासकर तब जब उसके पास खुद के नाम पर कोई मान्य निवास प्रमाण दस्तावेज़ न हो। यह उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जो अक्सर स्थान बदलते हैं और नए पते का प्रमाण नहीं दे पाते हैं।
क्यों हटाया गया केयर ऑफ
प्राधिकरण का कहना कि आधार केयर ऑफ के सामने दर्ज नाम कार्ड धारक के माता-िपता, पति, पत्नी, अिभभावक या कार्ड धारक द्वारा दिया गया कोई अन्य भी हो सकता है, चूंकि यूआईडीएआई न तो ऐसे संबंध का प्रमाण मांगता है और न ही किसी अन्य माध्यम से इसकी पुष्टि करता है।
क्योंकि ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं जिनमें आधार कार्ड नंबर धारक ने उसके आधार के पता वाले हिस्से में दर्ज केयर ऑफ वाले कॉलम को संबंधित व्यक्ति या महिला से अपना संबंध संबंधित करने के लिए संस्थाओं के समक्ष साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया है, जो गलत है।
पहले हटाया गया था son of और wife of
बता दें कि इससे पहले आधार कार्ड में वाइफ ऑफ (W/o), सन ऑफ (S/o), या डॉटर ऑफ (D/o) लिखा जाता था, लेकिन वर्ष 2018 में आए सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले के बाद रिश्तों को गोपनीय रखने के उद्देश्य से आधार में केयर ऑफ (C/o) लिखा जाने लगा था। इसके पीछे तर्क था कि आधार कार्ड सिर्फ एक व्यक्ति की पहचान का पत्र है, और इसमें रिश्तों की जानकारी देने का प्रावधान नहीं है।
हर दिन पहुंच रहे करीब 1500 से 2000 लोग
रतन स्क्वायर स्थित आधार सेवा केंद्र के मैनेजर कैप्टन देव राज त्रिपाठी (रिटा.) ने बताया कि यहां दूर-दूर के जिलों से हर दिन करीब 1500 से 2000 लोग पहंुचते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की होती है जो अपने आधार में संशोधन के लिए आते हैं। त्रिपाठी ने बताया कि यहां करीब 2 दर्जन से अिधक स्टाफ के साथ 16 मशीनों से सप्ताह के सातों दिन काम हो रहा है, ऑनलाइन स्लॉट बुक करने वालों को लाइन में नहीं लगना पड़ता, लेकिन जो लोग बिना स्लॉट बुक कराये आते हैं, उन्हें लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक लोगों के आधार एनरोलमेंट या संशोधन का कार्य किया जा रहा है।
त्रिपाठी को आधार सेंटर में उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए हाल ही में विधान परिषद के चेयरमैन कुंवर मानवेन्द्र सिंह द्वारा प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद द्वारा भी उन्हें सम्मानित िकया गया है।
