नवरात्री स्पेशल 2025: दुर्गा महाविद्या रूप में बरसती मां की कृपा

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Edited By Anjali Singh
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आदिशक्ति, जिनके अलग- अलग नाम हैं पर स्वरूप एक ही है। चराचर जगत को शक्ति देना जिनका उद्देश्य है मां को आद्या शक्ति और परा शक्ति के नाम से भी जाना जाता है, जो निराकार ऊर्जा हैं। उनका कोई रूप नहीं है, वे समस्त कारणों की कारण हैं। समस्त तत्वों में विद्यमान हैं। इन शक्तियों की 10 महाविद्याओं का पूजन करते हैं  जो संसार में चक्र को गति मान बनाने और देवीय तत्वों को जीव मात्र से जोड़ने का विधान है और उन के समस्त कलमश को समाप्त कर पूर्ण मनोयोग जागृत करती हैं और समस्त कमनाओं की पूर्ति कर मोक्ष प्रदान करती हैं। इन महाविद्याओं को धारण करने के लिए भगवान शिव के भी 10 रुद्र अवतार हुये हैं क्योंकि शक्ति को धारण करने वाले शिव ही हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 10 दिनों के होंगे और भगवती की कृपा सभी पर बरसेगी। हम आपको मां के नौ दुर्गा स्वरूपों के साथ ही 10 महाविद्या स्वरूप के भी बारे में बता रहे हैं।

निराकार का आकार में प्रविष्ट

आदिशक्ति ब्रह्मांड की रचना, पालन और संहार के लिए  आकार धारण करती हैं। ब्रह्म्त्व, शिवत्व, विष्णुत्व का उदगम बनतीं हैं। साथ ही सृजन, विस्तार और संहार  के गुण को सृष्टि के कण- कण में विराजमान कराके जीव मात्र के उद्धार के लिए पृथ्वी पर अपने अलग- अलग स्वरूपों में विद्यमान होती हैं। इन स्वरूपों का पूजन हम नवरात्र महापर्व में 9 दिनों में करते हैं। वास्तव में आदिशक्ति की तीन मुख्य धारे हैं। महा काली, महा गौरी, महा सरस्वती हैं तमो गुण व्यापिनी,  रजौगुनी गुण व्यापिनी और सतो गुण व्यापिनी। तीन- तीन दिन महा काली, महा गौरी और महा सरस्वती के रजो गुणी, तमो गुणी और सतो गुणी स्वरूपों का पूजन होता है। 

मां के 9 दुर्गा स्वरूप

शैलपुत्री: देवी का पहला स्वरूप शैलपुत्री है, जो हिमालय की पुत्री हैं।

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ब्रह्मचारिणी: देवी का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है, जो ज्ञान और तपस्या की देवी हैं।

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चंद्रघंटा: देवी का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है, जो शांति और सौंदर्य की देवी हैं।

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कूष्मांडा: देवी का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है, जो सृष्टि की देवी हैं।

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स्कंदमाता: देवी का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता है, जो स्कंद की माता हैं।

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कात्यायनी: देवी का छठा स्वरूप कात्यायनी है, जो कात्यायन ऋषि की पुत्री हैं।

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कालरात्रि: देवी का सातवां स्वरूप कालरात्रि है, जो अंधकार और भय को दूर करने वाली देवी हैं।

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महागौरी: देवी का आठवां स्वरूप महागौरी है, जो शुद्धता और पवित्रता की देवी हैं।
सिद्धिदात्री: देवी का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री है, जो सिद्धि और ज्ञान की देवी हैं।

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दस महाविद्या स्वरूप

माँ काली: देवी का पहला महाविद्या स्वरूप काली है, जो समय और परिवर्तन की देवी हैं। माता का स्वरूप हाथ में त्रिशूल और तलवार है। 

तारा देवी: महाविद्या का दूसरा स्वरूप तारा है, जो ज्ञान और मोक्ष की देवी हैं। जो समस्त बधाओं को हर के इस जग से तरने वाली कहलाती हैं। 

त्रिपुरसुंदरी: देवी का तीसरा स्वरूप त्रिपुरसुंदरी है, जो सौंदर्य और आकर्षण की देवी हैं। मां चार भुजा और 3 नेत्र के सुंदर स्वरूप में विराजमान हैं।

भुवनेश्वरी: देवी का चौथा महाविद्या स्वरूप भुवनेश्वरी है, जो सृष्टि और पालन की देवी हैं। कमल पर विराजमान देवी का पूजन किया जाता है।

छिन्नमस्ता: पांचवां स्वरूप छिन्नमस्ता है, जो आत्म-बलिदान की देवी हैं। इनका स्वरूप कटा हुआ सिर और बहती हुई रक्त की तीन धाराएं से सुशोभित रहता है।

त्रिपुरभैरवी: देवी का छठा स्वरूप त्रिपुरभैरवी है, जो ज्ञान और मोक्ष की देवी हैं।

धूमावती: देवी का सातवां महाविद्या स्वरूप धूमावती है, जो विध्वंस और परिवर्तन की देवी हैं। मां मानसिक शक्ति प्रदान करती हैं।

बगलामुखी: देवी का आठवां स्वरूप बगलामुखी है, जो शत्रुओं को नष्ट करने वाली देवी हैं। मां पीतवर्ण में विराजमान हैं।

मातंगी: देवी का नौवां स्वरूप मातंगी है, जो संगीत और कला की देवी हैं।

कमला: देवी का दसवां महाविद्या स्वरूप कमला है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं।

गज पर सवार होकर आएंगी मां 

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22 सितम्बर 2025 को सूर्य उदय पर अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि प्राप्त होने के कारण नवरात्र महापर्व  का आरम्भ होगा। मां गज पर सवार होकर आ रही हैं, जो अत्यंत शुभ और सुख-समृद्धि, सौभाग्य की वृद्धि का संकेत है। इस बार तिथि वृद्धि के कारण नवरात्र में भक्तों को नौ नहीं पूरे 10 दिन आदिशक्ति के पूजन का सौभाग्य मिलेगा, और 11 वें दिन 2 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जायेगा। महा अष्टमी का पूजन 30 सितम्बर और नवमी का पूजन 1 अक्टूबर को किया जायेगा।

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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:09 से सुबह 08:06 तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त सुबह 11 :49 से दोपहर 12 :38 रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. स्वाति सक्सेना, संस्थापक अंतरंग फाउंडेशन