बदायूं : टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक, पैदल मार्च करके सौंपा ज्ञापन
सेवारत रहने व पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्यता खत्म न तक जारी रहेगा संघर्ष
बदायूं, अमृत विचार : कोर्ट के शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने बीएसए कार्यालय से डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च किया। सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं नारेबाजी करते हुए निकले। डीएम कार्यालय जाकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश पाल को सौंपा। शिक्षक नेताओं ने कहा कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो दिल्ली जाकर आंदोलन किया जाएगा।
शिक्षक-शिक्षिकाएं 25 अगस्त 2010 से पहले से नियुक्त शिक्षकों को सेवारत रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी (अध्यापक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता के फैसले के विरोध में हैं। मंगलवार दोपहर जिले के 15 विकास क्षेत्रों के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं हाथ में काली पट्टी बांधकर बीएसए कार्यालय पर एकत्र हुए। विरोध में कइयों ने काले रंग के कपड़े पहने। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात रहे। शिक्षक पैदल मार्च करते और नारेबाजी करते हुए भामाशाह चौक की ओर से गुजरे। हाथों में अपने ब्लॉक का बैनर और पोस्टर थे। शिक्षकों ने काला कानून वापस लो, शिक्षकों की मांगें पूरी करो, राष्ट्र निर्माताओं के साथ अन्याय स्वीकार नहीं आदि नारे लगाए।
ज्ञापन देकर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि सरकार ने 2009 में कानून बनाकर टेट की अनिवार्यता को लागू किया था। उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी के अनिवार्यता थोपी जा रही है। इस निर्णय के बाद से परेशान कई शिक्षकों ने तो आत्महत्या तक कर ली है। इस कानून को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिला मंत्री उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि पहले हमारा प्रांतीय नेतृत्व सरकार से बात करेगा। अगर सरकार नहीं मानी तो दिल्ली में आंदोलन होगा। दहगावां ब्लॉक अध्यक्ष दामोदर सिंह यादव ने कहा कि जब-जब शिक्षकों के साथ अन्याय हुआ तो सरकार को संगठन के आगे झुकना ही पड़ा है। जिला उपाध्यक्ष अनुराग यादव ने कहा कि आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य करने के फैसले के बाद तीन शिक्षकों ने आत्महत्या कर ली। अगर जल्द निस्तारण नहीं होता है तो संगठन आगे की रणनीति तैयार करेगा।
जिला कोषाध्यक्ष सुशील चौधरी ने कहा कि पिछले कुछ साल से शिक्षकों के लिए विभिन्न स्तरों से नए-नए अव्यवहारिक आदेश जारी किए जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा को प्रयोगशाला बना दिया गया है। शिक्षकों के मान सम्मान से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिला प्रवक्ता आयुष भारद्वाज ने कहा कि यह कानून शिक्षकों पर थोपना निंदनीय है। जिससे देश भर के शिक्षक आक्रोशित हैं। जिसे वापस नहीं लिया गया तो बड़ा संघर्ष किया जाएगा। सलारपुर ब्लाक अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि चाहे विधानसभा का घेराव करना पड़े या संसद का। कानून किसी भी हालत में लागू नहीं होने दिया जाएगा।माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष देशराज सिंह यादव, जिला मंत्री आलोक पाठक, रमेश चंद्र पांडेय, सुधाकर शर्मा, यतींद्र शर्मा, आनंद गंगवार, सौरभ शर्मा आदि उपस्थित रहे।
