Moradabad : सीएम सिटी गोरखपुर और ताज सिटी आगरा में इस बार जिले के रामलीला कलाकारों का दिखेगा जलवा

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विनोद श्रीवास्तव, मुरादाबाद। मुरादाबाद में पौराणिक रामलीला की जड़ें काफी पुरानी और गहरी हैं। यहां की प्रसिद्ध प्ले बैक रामलीला की न सिर्फ प्रदेश बल्कि विदेशों में भी चमक बिखर रही है। रामलीला के लिए समर्पित योद्धा रामलीला निर्देशक पंकज दर्पण अग्रवाल ने इस कला को विदेशों तक जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके लिए वह विभिन्न मंचों पर कई बार सम्मानित हो चुके हैं। इस बार सीएम सिटी गोरखपुर और ताज सिटी आगरा में डॉ. पंकज द्वारा निर्देशित रामलीला में रामायण के विभिन्न पात्रों का जीवंत मंचन दिखेगा।

बालपन से ही रामलीला में रुचि लेने वाले डॉ. दर्पण जब बेसिक प्राइमरी स्कूल में तीसरे क्लास में पढ़ते थे तो स्कूल से वापसी में कंपनी बाग में रामलीला की तैयारियां देख एक दिन वहां पहुंचे और रामलीला निर्देशक से उन्हें भी रोल देने की गुजारिश की। लाल नेकर घर से लाने की बात बोलकर हनुमान जी की सेना में वानर बनाने की सहमति रामलीला मंचन करा रहे निर्देशक ने क्या दी फिर तो रामलीला पंकज की जिंदगी बन गई। इस दिशा में प्रेरित करने में इनके पिता स्वर्गीय लाला शिवलाल अग्रवाल का योगदान रहा है।

1966 में रामलीला में भर्ती होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। देश के कोने- कोने में लेकर विदेशों में भी उनके निर्देशित रामलीला की ख्याति है। 6 साल के बालक की रामलीला यात्रा आज 60 की उम्र पार करने के बाद भी जोश, जज़्बे और जुनून से लबरेज है।

डॉ. पंकज दर्पण बताते हैं कि बचपन मे उन्होंने रामलीला के कलाकारों को सीता जी, राम जी या नारद जी आदि के रोल करने वाले कलाकारों को पर्दे के पीछे बीड़ी या शराब पीते देखा तो मन बहुत दुखी हुआ। तभी किसी ने गुरु स्वर्गीय बलवीर पाठक से मिलवाया। जिन्होंने रामलीला में अनेक प्रयोग करके सुशिक्षित और संस्कारी बच्चों की एक रामलीला टीम बनाई थी। गुरु का आशीर्वाद और राम जी की कृपा से फिर जिंदगी राम नाम की सेवा में ही लग गया।

प्रकाश व ध्वनि के प्रयोग से दी इस विधा को मजबूती
वह मानते हैं कि एक दौर आया जब दूरदर्शन के अनेक चैनल्स आने के बाद रामलीला में अच्छे दर्शकों का आना बहुत कम हो गया। और ये माना जाने लगा कि रामलीला सिर्फ निचले और पिछड़े लोगों के देखने की ही चीज है। लेकिन डॉ. पंकज ने इसे चुनौती के रूप में लेकर पुनः रामलीला को स्वस्थ मनोरंजन और संस्कार देने का माध्यम बनाने के साथ ही तथाकथित अभिजात्य वर्ग को भी आकर्षित करने के लिये मुरादाबाद की रामलीला के पारंपरिक स्वरूप में प्रकाश व ध्वनि के कई प्रयोग कर मजबूती दी।

बड़ी स्क्रीन पर विभिन्न दृश्यों के मंचन से आई भव्यता
स्टेज के बैक ग्राउंड में पर्दे या लकड़ी के सेट्स के स्थान पर बड़ी स्क्रीन पर विभिन्न दृश्य- जंगल, महल, कुटिया, नदी, बादल, युद्ध भूमि आदि प्रदर्शित किए गए। राजाओं की एंट्री हो या युद्ध मे शस्त्रों की टंकार- दुख के सीन में शोक का संगीत या खुशियों के समय वैसा ही खुशनुमा संगीत ने रामलीला को भव्यता प्रदान की। वह बताते हैं कि दूरदर्शन धारावाहिकों की भव्यता से मुकाबला करने व दर्शकों को लाने के लिए एक साथ 3 लैपटॉप का प्रयोग करके रामलीला के संवाद, संगीत और दृश्य का प्रदर्शन किया जाता है। इसके अलावा खुला बड़ा मंच, जिस पर कोई पर्दा उठाने या गिराने की जरूरत नहीं, महिला पात्र महिला द्वारा ही निभाना। यह मुरादाबाद की रामलीला की अपनी विशेषता है।

स्वयं तैयार करते हैं रामलीला की स्क्रिप्ट
डॉ. पंकज के निर्देशन की एक विशेषता यह भी है कि रामलीला की स्क्रिप्ट वह स्वयं तैयार करते हैं। तुलसीदास कृत रामचरित मानस को आधार मानते हुए उन्होंने 16 विभिन्न रामायणों का अध्ययन कर विशिष्ट स्क्रिप्ट बनाई है। इसमें सरल भाषा मे संवाद के साथ ही कर्णप्रिय गीत व संवाद को जोड़ा है।

कई मंचों पर हो चुके हैं सम्मानित
देश के 24 प्रदेशों व विश्व के अनेक देशों में मंचन के लिए सम्मानित होने वाले डॉ. पंकज को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा 16 प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के हाथों भी उन्हें पुरस्कार प्राप्त होने का गौरव हासिल है।

22 सितंबर से गोरखपुर में होगा मंचन, करेंगे निर्देशन
डॉ. पंकज दर्पण के निर्देशन में इस बार सीएम सिटी गोरखपुर में 22 सितंबर से 5 अक्टूबर तक गोरखनाथ मोहल्ले के मानसरोवर के समीप स्थित रामलीला ग्राउंड में मंचन किया जाएगा। यहां पर स्वयं गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रामलीला मंचन के दौरान पहुंचते हैं। रामलीला के कलाकारों व निर्देशक को उनके हाथों सम्मान मिलता है। इसके अलावा आगरा फोर्ट के पास 11 सितंबर से रामलीला के मंचन के लिए पूजन भी हो चुका है। वह बताते हैं आगरा में रामलीला के दौरान निकलने वाली राम बरात काफी विख्यात है।

 

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