कानपुर: हैलट में देश का दूसरा मदर सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट बनकर तैयार, अब समय पहले जन्मे व बीमार बच्चे नहीं रहेंगे अपनी मां व पिता से दूर
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में देश का दूसरा मदर सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट स्थापित किया गया है, जहां पर समय से पहले जन्में, कम वजन और कमजोर बच्चों को कंगारू मदर केयर (केएमसी) थेरेपी देकर उनको तंदुस्त किया जाएगा। यहां पर खास बात ये होगी कि बीमार बच्चें मां से दूर नहीं रहेंगे। उनको यहां पर माता, पिता या अन्य सगे संबंधी सीने लगाकर थेरेपी दे सकेंगे। इसकी शुरुआत दीपावली से होनी है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल का सोमवार को प्राचार्य प्रो.संजय काला, प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह व सीएमएस डॉ.सौरभ अग्रवाल ने गोल्डी मसाले के निदेशक सुदीप गोयनका व समूह से जुड़े अन्य लोगों के साथ भ्रमण किया। प्राचार्य ने गोल्डी समूह के सदस्यों को अस्पताल परिसर में होने वाले कार्यों और यहां पर दी जा रही मेडिकल सुविधाओं की जानकारी दी।
बाल रोग विभाग में निर्माणाधीन मदर सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट के बारे में प्राचार्य ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जन्मे कुछ बच्चों का वजन कम होता है या किसी कारण वह बीमार हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को एनआईसीयू में भर्ती किया जाता है, जिसकी वजह से वह मां अपनी से दूर हो जाते हैं। लेकिन इस यूनिट से बन जाने से बच्चे अपनी मां से दूर नहीं रहेंगे।
बताया कि उत्तर प्रदेश में पहली बार मदर सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना जीएसवीएम में की जा रही है। देश में यह दूसरी यूनिट होगी। पहली यूनिट दिल्ली के सफदरजंग में है। यह यूनिट 20 बेड की होगी। इस यूनिट में विशेष बात यह है कि यहां पर समय से पहले जन्में व कमजारे बच्चों को उनकी मां के साथ केएमसी थेरेपी के लिए रखा जाएगा।
इससे मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव व लगाव होगा। साथ ही मां व बच्चा दोनों ही बीमार होने पर ठीक हो सकेंगे। यूनिट का निर्माण कार्य संबंधित ठेकेदार को दीपावाली से पहले करने के निर्देश दिए है। गोल्डी मसाले के निदेशक सुदीप गोयनका ने अस्पताल में किए जा रहे कार्यों की तरीफ की और जरूरत पड़नें पर सहयोग की बात कहीं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकार ने की है शोध
अस्पताल में आने वाली कई गर्भवतियों को असहायनीय दर्द व अन्य कारण से समय से पहले प्रसव हो जाता है, ऐसे में बच्चे का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता। ऐसे में बच्चे का वजन औसत से कम और शरीर काफी कमजोर होता है। बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार व वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश चेलानी ने करीब दो वर्ष पहले एक शोध किया, जिसमे समय से पहले जन्मे कुछ बीमार बच्चों को उनकी मां के सीने ऊपर काफी समय तक लिटाया गया। ऐसा करने से बच्चों के स्वास्थ्य में काफी हद तक सुधार आया। इसके बाद उन्होंने इस शोध को पूरे देश में लागू करने की योजना बनाई और नाम कंगारू मदर केयर रखा गया। क्योंकि कंगारू अपने बच्चे को सीने से लगाकर रखती है।
बच्चे को मशीन में रखने की नहीं होगी जरूरत
डब्ल्यूएचओ की प्रभारी डॉ. योशिदा साचियो के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार व वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश चेलानी ने यह शोध भारत के साथ ही अफ्रीका, बांग्लादेश समेत छह देशों में किया है। शोध से स्पष्ट हुआ कि अस्वस्थ बच्चे मां के सीने पर लेटने से स्वस्थ हुए। बच्चों को केएमसी देने पर मशीन में रखने की जरूरत नहीं होगी।
साथ ही रुपये की भी बचत भी होगी। यूनिट की शुरुआत कानपुर जीएसवीएम से होने जा रही है। इस यूनिट में बच्चों को कैसे लिटाना है, कैसे उन्हें दूध देना है या किसी तरह से उनका पालन-पोषण किया जाए, इस संबंध में स्टाफ नर्स और डॉक्टर को ट्रेनिंग दी जाएगी।
