तौकीर का भड़काऊ बयान : "भारत में अघोषित हिंदू राष्ट्र कायम, 26 को रोका तो शहर के लिए अच्छा नहीं होगा"
बरेली, अमृत विचार। आला हजरत खानदान से संबंध रखने वाले और आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने मंगलवार को मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि भारत में अघोषित तरीके से हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया गया है। पुलिस हमारी शिकायत नहीं सुन रही। हमारे धर्म और पैगंबर की शान में गुस्ताखी की जा रही है, शिकायत करने जाते हैं तो उल्टा हमारे युवाओं पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर 26 तारीख को प्रदर्शन करने से रोका तो ये शहर के लिए अच्छा नहीं होगा।
मौलाना ने कहा कि दे मुस्लिम नौजवानों पर झूठे मुकदमें दर्ज किए हैं। भारत में अघोषित तरीके से हिंदू राष्ट्र कायम कर लिया गया है। मुसलमान पर कहीं जुल्म हो रहा है, पैगंबर की शान में गुस्ताखी हो रही है। मुसलमान थाने में शिकायत लेकर जाते हैं तो उनकी शिकायत नहीं लिखी जाती। क्योंकि वहां हिंदुत्व की शक्ल में पुलिस बैठी हुई है। नवरात्र में मीट पर पाबंदी लगा दी गई है। इसका मतलब ये है कि हमारे लिए मीट बिक भी नहीं रहा है, क्योंकि हिंदू समुदाय के लोग नवरात्र में मीट नहीं खाते इसलिए पाबंदी लगाई जा रही है। इस तरह की बातें इशारा करती हैं कि बाकयता हिंदुस्तान में हिंदू राष्ट्र कायम हो चुका है। जब हिंदू राष्ट्र कायम हो चुका है तो इसकी घोषणा होनी चाहिए। ताकि धीरेंद्र शास्त्री जैसे लोग हिंदू राष्ट्र बनाने जैसी बाते करनी बंद करें।रामभद्रचार्य के पश्चिमी यूपी को मिनी पाकिस्तान बनाने के बयान पर उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य वही बात कहेंगे जिससे मुल्क के माहौल को नुकसान पहुंचे। सरकार ने उन्हें अभी तक ये नहीं बताया है कि देश में हिंदू राष्ट्र कायम हो चुका है।
डॉ. नफीस के शब्द गलत लेकिन मंशा सही
आईएमसी नेता डॉ. नफीस के हाथ काट देने वाले बयान को लेकर कहा कि उनकी भाषा बिल्कुल गलत थी। उन्होंने जो कहा वो ठीक नहीं। लेकिन उस वक्त उन्होंने आई लव मोहम्मद के बैनर उतराने से आक्रोशित मुस्लिम युवाओं को शांत करने के लिए इस तरह की बात की। इसके पीछे उनकी कोई गलत मंशा नहीं थी।
उलमा से निराश नौजवान उठा लेंगे गलत कदम
मौलाना ने कहा कि नेपाल और बांग्लादेश में नौजवानों ने अपने ही देश को जलाने का काम किया, क्या वो देश प्रेमी नहीं थे। हमारे नौजवान भी अपने देश से बहुत प्यार करते हैं। मगर सरकार हमारे खिलाफ है, फिर भी अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। मुसलमान युवा अगर हमसे और हमारे उलमा से निराश होकर खुद कोई कदम उठा लिया तो उसका नुकसान हमारे देश और हमारी कौम को बर्दाश्त करने पड़ेंगे। हमे कत्ल कर दीजिए लेकिन उनके धर्म में दखलअंदाजी नहीं करें। उन्हें आई लव मोहम्मद लिखने से नहीं रोका जाए। 26 तारीख को होने वाले प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि शांति के साथ वह अपनी बात रखेंगे, जिस तरह पहले की। अगर कोई जबरदस्ती की जाएगी तो ये हमारे शहर, देश और प्रदेश के लिए अच्छा नहीं होगा।
