कुंभलगढ़ किला: वास्तुकला, वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
डॉ. विकास शुक्ला, वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन
राजस्थान समृद्ध इतिहास और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए भारत ही नहीं दुनियाभर से पर्यटक आते हैं। यह राज्य अपने खानपान और कल्चर के लिए प्रसिद्ध है। यहां के राजसमंद जिले में बसा कुंभलगढ़ किला सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि वास्तुकला, वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। यह किला एक बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह किला राजस्थान प्रांत के गौरव, अदम्य साहस और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। यहां का वैभव देखते ही बनता है। यहां आने वाले पर्यटक अपने साथ यहां की यादें और कहानियां व इतिहास का एक टुकड़ा लेकर लौटते हैं। हर साल यहां ढाई से तीन लाख सैलानी घूमने आते हैं। कुंभलगढ़ किला इतिहास के पन्नों में राणा कुंभा की आन-बान-शान का प्रतीक है। कुंभलगढ़ की सर्दियों और उत्सवों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। किले के चारों ओर 36 किमी लंबी दीवार है, जिसे ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया कहा जाता है।
सर्दियों में होती ज्यादा भीड़
अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर में विदेशी पर्यटकों की ज्यादा भीड़ होती है। किले में आयोजित होने वाले मेले, उत्सव और सर्दी के मौसम में जंगल सफारी में जानवरों की मस्ती देखने का मजा ही अलग होता है। यह किला पर्यटकों की शेरगाह का प्रमुख स्थान है। किला मेवाड़ की आन-बान-शान का प्रतीक है। 15 वीं शताब्दी में मेवाड़ शासक महाराणा कुंभा ने इसका निर्माण कराया था। किले के चारों ओर करीब 36 किलोमीटर लंबी दीवार है। इसे ‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ भी कहते हैं। इस दीवार की विशालता चीन की ग्रेट वॉल के बाद दुनिया में दूसरा स्थान रखती है। किले से दिखने वाला हरा-भरा अरावली का विस्तार और जंगल सफारी लोगों में रोमांच भर देती है। यही वजह है कि यह किला लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह किला जितना शानदार है, उतना ही शानदार इसका इतिहास उत्कृष्ट है।
किले में सात दरवाजे हैं
इस किले में प्रवेश के लिए सात गढ़वाले प्रवेश द्वार हैं। इनके नाम अरेट पोल, हनुमान पोल, राम पोल, विजय पोल, निंबू पोल, पाघरा पोल और टॉप खाना पोल है। किले में ही बादल महल भी है, जोकि किले के सबसे ऊंचाई वाले स्थान पर स्थित है। महल के आसपास बादलों का मनोहारी दृश्य दिखता है। इस वजह से इसे बादल महल भी कहते हैं। किला परिसर में 360 से अधिक मंदिर स्थापित हैं, जिनमें से 300 जैन मंदिर हैं और बाकी हिंदू हैं। इन मंदिरों में शिव मंदिर, वेदी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर मम्मदेव मंदिर, लक्ष्मी नारायण भगवान का मंदिर प्रसिद्ध है। किले की वास्तुकला, ऊंची पहाड़ियां, हरियाली, घना जंगल यहां आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। पर्यटक यहां किले के साथ ही यहां के हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन, लोककला और आदिवासी संस्कृति के भी कायल हैं। यही वजह है कि कुंभलगढ़ सिर्फ किले तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में भी विश्व मानचित्र पर उभर चुका है।
अभेद्य किले के रूप में पहचान
इस किले की गिनती देश के सबसे अभेद्य किलों में होती है। इसे मेवाड़ किले के नाम से भी जाना-पहचाना जाता है। यह ऐतिहासिक किला महाराणा प्रताप का जन्मस्थान भी है। दुश्मन इसे कभी जीत न सके इसलिए इसके निर्माण के समय सुरक्षा के हर पहलू पर ध्यान रखा गया। इसके सात द्वार, 13 पर्वत चोटियां, वॉच टावर सदैव आक्रमणकारियों के लिए चुनौती रहे हैं।
यूनेस्को ने घोषित कर रखा है विश्व धरोहर
यह किला यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल है। 2013 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल चुना गया था। अपनी कई सारी खूबियों और शानदान इतिहास की वजह से ही इसे विश्व धरोहरों की सूची में स्थान मिला। शाम के पर्यटक लाइट एंड साउंड शो का लुत्फ उठाते हैं।
NOTE : इसके लेख के फोटो नेट से या कानपुर से मांग लें। पेज वहीं बना था. मैटर यहां से गया था।
