पीलीभीत: खेत में लगे जाल में फंसा तेंदुआ, चार घंटे तक चला रेस्क्यू, नरकुल ने बढ़ाई मुश्किल
पीलीभीत, अमृत विचार: पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर निकला एक तेंदुआ खेत में लगे जाल में फंस गया। सूचना पर वन महकमे में हड़कंप में पहुंच गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जाल में उलझे तेंदुओं को रेस्क्यू करने के लिए अभियान चलाया गया। करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तेंदुआ को ट्रेंकुलाइज कर पिंजड़े में कैद कर लिया गया। रेस्क्यू किए गए तेंदुआ को पीटीआर मुख्यालय लाया गया। जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वन अफसरों के मुताबिक तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है।
घटना कलीनगर तहसील क्षेत्र के नगरिया कट में शुक्रवार सुबह हुई। बताते हैं कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के अंतर्गत कट बुझिया के जंगल से निकला एक तेंदुआ खेतों में लगे जाल में फंस गया। जाल में बुरी तरह उलझे तेंदुआ ने बाहर निकलने का भी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं निकल सका। किसी तरह वह पास में खड़े नरकुल में जा पहुंचा। इधर सुबह करीब 06 बजे कुछ ग्रामीण उधर से गुजरे तो उन्हें खेत के नजदीक खड़े नरकुल में कुछ हलचल सुनाई दी। जब उन्होंने उस स्थान पर देखा तो एक तेंदुआ जाल में उलझा हुआ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पास की वन चौकी के वनकर्मियों को दी। सूचना मिलते ही नौजल्हा वन चौकी के टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने खोजबीन शुरू की तो तेंदुआ जाल में फंसा दिखाई दिया। तेंदुआ के जाल में फंसे होने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। इससे वन महकमे में हड़कंप मच गया। कुछ देर बाद ही वन एवं वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ भरत कुमार डीके, पीटीआर के उप प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चौहान, ट्रंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. दक्ष गंगवार, बराही रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी अरुण मोहन श्रीवास्तव भी अन्य वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए।
नरकुल ने बढ़ाई मुश्किल, कड़ी मशक्कत के बाद किया रेस्क्यू
डीएफओ, ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट समेत टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। खेत के समीप नरकुल में मौजूद तेंदुआ को जाल के माध्यम से रेस्क्यू करने का प्रयास किया गया। मगर टीम को उसमें काफी देर बाद तक सफलता नहीं मिल सकी। इस बीच नरकुल में खोजबीन के दौरान तेंदुआ वन कर्मियों पर झपट पड़ा। गनीमत यह रही कि वनकर्मी तुरंत पीछे गए। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया और तेंदुआ को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू करने की अनुमति ली गई। अनुमति मिलने के बाद ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. दक्ष गंगवार के साथ रेस्क्यू टीम खेत में धान की फसल खड़ी होने के चलते पैदल ही तेंदुआ तक पहुंची। ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट ने तेंदुआ को ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया, मगर नरकुल आड़े आ गए। वन कर्मियों की मदद से तेंदुआ के आसपास खड़े नरकुल को हटाया गया। दोपहर करीब एक बजे तेंदुआ को ट्रेंकुलाइज कर लिया गया। बेहोश तेंदुआ को रेस्क्यू कर पिजड़े में कैद किया गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम रेस्क्यू किए गए तेंदुआ को पीटीआर मुख्यालय लाया गया। जहां डॉ. दक्ष गंगवार द्वारा तेंदुआ का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वन अफसरों के मुताबिक तेंदुआ की उम्र करीब चार साल है। फिलहाल वन अफसर उसके शरीर में किसी भी तरह की चोट न होने और उसके स्वस्थ होने की बात कह रहे हैं।
जाल की नहीं सुलझी गुत्थी
फिलहाल जाल में फंसे तेंदुआ को तो सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। मगर, जाल किसने लगाया और क्यों लगाया, इसकी गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ सकी है। बताते हैं कि इस क्षेत्र में लोग जंगली सुअर आदि का शिकार जाल के जरिए करते हैं। फिलहाल वन अफसर इसकी जांच पड़ताल में लगे हुए हैं।
तेंदुआ को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। फिलहाल उसके शरीर पर कोई चोट आदि के निशान नहीं पाए गए हैं। रेस्क्यू किए जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तेंदुआ को सुरक्षित छोड़ने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - भरत कुमार डीके, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग।
