कानपुर : हृदय रोग संस्थान में बनेगी सबसे बड़ी हार्ट ट्रांसप्लांट यूनिट, हाइब्रिड ओटी और कैथ लैब की सुविधा भी जल्द ही मिलेगी
कानपुर, अमृत विचार। कार्डियोलाजी सोसाइटी की ओर से जारी रिपोर्ट में हृदय रोग के इलाज में प्रदेश में स्थान मिला है, जबकि केजीएमयू के कार्डियोलॉजी को पहला स्थान प्राप्त हुआ है। लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट और एसजीपीजीआई को चौथा स्थान मिला है। लखनऊ के जही एक निजी अस्पताल को पांचवीं रैंकिंग मिली है।
शहर में लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान(कार्डियोलाजी) में हृदय रोगियों को अच्छा इलाज मिल रहा है। यूं कहें तो तमाम बड़े संस्थान जो हृदय रोगियों के सर्वोत्त्म इलाज का दावा करते हैं उनका दावा इस रैंकिंग में फेल हो गया है। हृदय रोग संस्थान ने तो लखनऊ के एसजीपीजीआई को भी इस मामले में पीछे छोड़ दिया है। संस्थान में एक साल में साढ़े चार लाख मरीजों का ओपीडी में ही परीक्षण किया गया।
इसमें 37,600 से ज्यादा मरीजों की हृदय की सर्जरी की गई। अब इस संस्थान को इंस्टीट्यूट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने की तैयारी है। यहां एंजियोप्लास्टी, बाईपास सहित सभी प्रकार की हार्ट सर्जरी होती है। सूबे की सबसे बड़ी हार्ट ट्रांसप्लांट यूनिट बनाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इस पर सहमति बन गई है। जल्द ही मंजूरी की घोषणा हो जाएगी।
साथ ही संस्थान में हार्ट ट्रांसप्लांट के लाइसेंस की स्वीकृति की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। हाइब्रिड ओटी और कैथ लैब की सुविधा भी जल्द ही मिल जाएगी, क्योंकि उनके निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। आयुष्मान कार्डधारकों को ट्रीटमेंट देने के मामले में इंस्टीट्यूट प्रदेश में पहले स्थान पर है। संस्थान में बड़े पैमाने पर आयुष्मान कार्ड धारकों की मुफ्ते में सर्जरी और इलाज हो रहा है।
मरीज का आयुष्मान कार्ड देखकर पहले इलाज शुरू होता है, बाकि प्रक्रिया बाद में की जाती है। संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा ने बताया कि संस्थान में बेहतर सुविधाओं के लिए जो भी कदम उठाए जाने हैं हम सब उठा रहे हैं। हाइब्रिड ओटी, कैथ लैब का काम चल रहा है। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए लाइसेंस भी जल्द ही स्वीकृत हो जाएगा।
