सफलता की कहानी : आत्मविश्वास, जज्बा और दूरदर्शिता सफल एंटरप्रेन्योर की गारंटी
उद्यम में सफलता के अनुभव साझा कर रहे उद्योगपति शिव कुमार अग्रवाल, बोले-संघर्ष और समस्याओं को सुलझाना अलजेब्रा हल करने जैसा
रुद्रपुर: खुद पर भरोसा और जज्बा हो तो आप दूरदर्शिता के साथ बढ़ते हुए कामयाब एंटरप्रेन्योर बन सकते हैं। मैं उद्यम के क्षेत्र में सफल होने के लिए सच्चाई, ईमानदारी और निडरता के साथ कामयाबी की डगर पर नित नए पड़ाव तय करता रहा। एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी परिवार में पैदा होने के कारण निडरता और एंटरप्रेन्योरशिप जैसे गुण मेरे जींस में रहे हैं।
आजादी के कुछ साल बाद यानी 1952 में जन्म होने के बाद बावजूद मैं अपने घर पर उस जमाने के नामी नेताओं और प्रतिष्ठित लोगों का जमघट देखकर और उनसे बातचीत कर रोमांचित होता था। संयुक्त परिवार से संबंधित होने के कारण मुझे सभी संस्कार मिले थे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बड़ों का भरपूर आदर करना था।
14 साल की उम्र में हाईस्कूल पास किया। उस समय मातृभाषा होने के कारण अपनी हिन्दी को लेकर आत्मविश्वास था इसलिए उसे पढ़ा नहीं। उस समय के माहौल में अंग्रेजी पढ़ी नहीं गयी। हां, मेरा अलजेब्रा सबसे स्ट्रांग था और इसमें खूब मजा आता था। इसमें मैं हमेशा कम से कम 99 प्रतिशत सवाल हल कर लेता था। मुझे लगता है कि हम सभी की जिंदगी भी अलजेब्रा की तरह है। तमाम तरह के संघर्ष और समस्याओं को सुलझाना जिंदगी का अलजेब्रा हल करने जैसा ही है। मेरी तमन्ना एयरफोर्स में जाने की थी क्योंकि यह मुझे रोमांचित करता था, लेकिन घर वाले मुझे एंटरप्रेन्योरशिप की राह पर आगे बढ़ते हुए देखना चाहते थे।
आखिरकार मैंने सिर्फ 18 साल की उम्र में उद्यमिता की राह पर अपने कदम बढ़ा दिए। मैंने अकेले दम पर सबसे पहले खुद की राइस मिल लगाई और फिर मुझे पीछे मुड़कर देखने की नौबत नहीं आयी। इसके बाद मैंने एक-एक करके लगातार कई यूनिट्स लगाईं। इस प्रक्रिया में मुझे जो संघर्ष करना पड़ा, उसे मैं जरूरी और किसी भी कीमत पर सस्ता समझता हूं। मेरा मानना है कि अनुभव एक पूंजी की तरह है जो किसी भी तरह हासिल करना चाहिए। भले ही इसके लिए कभी नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े। इससे परिपक्वता आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। उद्यमिता की राह में मिलने वाले अनुभवों को मैंने पूरी तरह एंज्वाय किया।
इससे मैं और ज्यादा निडर हुआ। मैंने अपनी अब तक की लाइफ में उतार-चढ़ाव और नुकसान बहुत देखे हैं पर मेरा मानना है कि एंटरप्रिन्योरशिप की राह सांप-सीढ़ी के खेल जैसी है। कभी किसी निर्णय से आपको बहुत लाभ मिल सकता है तो किसी भी एक निर्णय या कदम से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद मैंने जमीर को कभी खराब या खत्म नहीं होने दिया।
यहां तक कि अभाव महसूस होने पर भी मैंने कभी समझौता नहीं किया। शायद यही कारण है कि इससे मिलने वाली ताकत के कारण ही मैं हमेशा कांफिडेंट रहता हूं। इसके अलावा मेरे लिए सच्चाई और ईमानदारी भी बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। चाहे वह किसी के प्रति भी हों। मुझे लगता है कि इन गुणों के साथ अगर किसी काम के प्रति आपका डेडिकेशन है तो आपकी आईक्यू भी शार्प होगी और आप कामयाबी की राह पर निश्चित रूप से हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे।
दोनों पुत्र भी स्थापित कर रहे कीर्तिमान
शिवकुमार अग्रवाल के दोनों पुत्र अभिषेक एवं सौरभ भी उनके पदचिन्हों पर चल रहे हैं। उन्होंने युवा उद्यमी के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनायी है। शिवकुमार द्वारा लगाये गये पौधे को वटवृक्ष के रूप में विकसित कर रहे हैं। उत्तराखंड राज्य के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल, आंध्र प्रदेश तक अपने व्यवसाय का विस्तार सफलतापूर्वक करते हुए संस्था को तेजी से आगे बढ़ाकर नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। वर्तमान में तीसरी पीढ़ी भी कंधे से कंधा मिलाने को तत्पर है... लेखक, शिवकुमार अग्रवाल, उद्योगपति, ऊधमसिंह नगर
