बरेली: ये रोडवेज की बसें हैं साहब… धक्का लगाओगे तभी दौड़ेंगी
बरेली,अमृत विचार। परिवहन विभाग भले ही बसों में सुखद यात्रा के दावे कर रहा हो मगर हकीकत कुछ और ही है। अगर आप रोडवेज बसों में यात्रा करने जा रहे हैं तो धक्का लगाने को तैयार रहें। आपको कभी भी बस को धक्का लगाना पड़ सकता है। यदि धक्का नहीं लगाया तो यात्रा करने को …
बरेली,अमृत विचार। परिवहन विभाग भले ही बसों में सुखद यात्रा के दावे कर रहा हो मगर हकीकत कुछ और ही है। अगर आप रोडवेज बसों में यात्रा करने जा रहे हैं तो धक्का लगाने को तैयार रहें। आपको कभी भी बस को धक्का लगाना पड़ सकता है। यदि धक्का नहीं लगाया तो यात्रा करने को भी नहीं मिलेगी। हाल ही में बरेली डिपो की एक बस का मामला सामने आया है। इसमें यात्रा से पहले यात्रियों को धक्का लगाना पड़ रहा है।
पुराने बस अड्डे से हर दिन लगभग सभी मार्गों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। इनमें से कुछ बसें बरेली-बिसौली मार्ग पर भी वाया आंवला होकर जाती हैं। इस मार्ग पर चलने वाली बसों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इस मार्ग पर जाने वाली यूपी25 एटी 4436 नंबर की बस में यात्रा करने से पहले यात्रियों को बस में धक्का लगाना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि बस में बैटरी ही नहीं है। इसलिए बस अपने आप चालू नहीं हो सकती। जब इस बस की और हकीकत जानने की कोशिश की तो पता चला कि बस में न तो लाइटें ठीक हैं और न ही फॉग लाइटें लगी हैं। पूरी बस की हालत एकदम कबाड़ हो चुकी है। इसके बाद भी यात्रियों को इसमें बैठाया जा रहा है। ऐसे में कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
करीब 27 फीसदी बसें हो चुकी हैं कबाड़
रोडवेज कर्मचारियों की मानें तो रोडवेज की एक बस को 10 लाख से 12 लाख किलोमीटर चलने के बाद उसे कबाड़ मान लिया जाता है। इन दिनों रोडवेज के पास बरेली और रुहेलखंड डिपो में करीब 402 बसें संचालित हो रही हैं। इनमें 201 बरेली और 201 रुहेलखंड डिपो के पास हैं जबकि दोनों डिपो में करीब 150 बसें ऐसी हैं जो 10 लाख किलोमीटर से अधिक संचालित हो चुकी हैं। ऐसे में इन बसों को लगातार मार्गों पर दौड़ाया जा रहा है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
“मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अमूमन बसों में बैटरी डाउन होने के बाद ही यह स्थिति आती है। यदि उसमें बैटरी ही नहीं है तो मैं इसकी जांच कराता हूं। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” -चीनी प्रसाद, एआरएम बरेली डिपो
