बरेली: स्वच्छता की परीक्षा का अगले माह आएगा परिणाम, तैयारी अधूरी

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। छह हजार अंकों की स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की परीक्षा का परिणाम अगले माह जारी होगा। इस परीक्षा में पास होने के लिए बरेली नगर निगम को गंदगी से उबरना होगा। शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। ऐसे में शहरवासी अपने शहर को स्वच्छ कैसे बता पाएंगे। केंद्रीय टीम के सामने …

अमृत विचार, बरेली। छह हजार अंकों की स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की परीक्षा का परिणाम अगले माह जारी होगा। इस परीक्षा में पास होने के लिए बरेली नगर निगम को गंदगी से उबरना होगा। शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। ऐसे में शहरवासी अपने शहर को स्वच्छ कैसे बता पाएंगे। केंद्रीय टीम के सामने फीड बैक खराब चला जाएगा। वहीं, 30 दिसम्बर तक वेबसाइट पर पूरा डाटा भी अपलोड करना है।

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की परीक्षा चल रही है। तीसरी तिमाही खत्म होने जा रही है। इसी काम के आधार पर जनवरी माह में नतीजे घोषित होने हैं। छह हजार अंकों की परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक नगर निगम के कार्यों पर दिए जाने हैं। अभी तक हुए काम के जरिए अंक बढ़ेंगे जबकि जल प्रबंधन और बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण पर भी इस बार नम्बर दिए जाएंगे। पिछली बार इसके नंबर नहीं थे।

नगर निगम की रैंकिंग पर गौर करें तो वर्ष 2019 में स्वच्छता की बरेली शहर 117वें स्थान पर था। वर्ष 2020 में 149वें पायदान पर आ गया। स्वच्छता सर्वे में शहर में 32 रैंक पीछे पहुंचने के बाद अब 2021 में बेहतर प्रदर्शन करने का अफसर दावा कर रहे हैं। अब देखना है कि इस बार अपना शहर रैंकिंग में आगे बढ़ पाता है या नहीं।

इस बार के सर्वेक्षण में शहरवासियों से फीडबैक लिया जाना है। अफसरों की तैयारी कागजों पर हो रही है। शहर में कई खाली जगहें कूड़ा स्थल के रूप में तब्दील होने लगी हैं। ऐसे में स्थानीय जनता केंद्रीय टीम को नकारात्मक फीडबैक दे सकती है। इसका असर रैंकिंग पर पड़ेगा क्योंकि 30 प्रतिशत अंक शहरवासियों द्वारा दिए जाने हैं। शहर की सड़कों और मोहल्लों में लगे कूड़े के ढेर भी रैंकिंग की राह में रोड़ा अटका सकते हैं क्योंकि गीला, सूखा और बायोमेडिकल कचरा अगल-अगल रखने की दिशा में भी कारगर पहल धरातल पर नहीं दिख रही है।

साथ ही डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन का हाल जानने के लिए स्वच्छता सर्वे के लिए आने वाली टीम वार्डों में जाकर लोगों से फीडबैक लेगी। वहीं, दूसरी तरफ सफाई को लेकर बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इसके चलते लोगों का फीडबैक खराब जा सकता है। दूसरी तरफ शहर ओडीएफ प्लस की श्रेणी में है लेकिन सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका कारण बताया जा रहा है कि सामुदायिक शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही निर्माण की भी समस्या है। कुछ जगहों पर सामुदायिक शौचालय निर्माणाधीन हैं।

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