'सुलगती बीड़ी से लगी आग..जिंदा जला बुजुर्ग' चारपाई पर मिला कंकाल, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
कानपुर, अमृत विचार। बिधनू में सुलगती बीड़ी से कमरे में आग लग गई। उठने-बैठने को लाचार बुजुर्ग की चारपाई भी जलने लगी। लपटे देख और बुजुर्ग की चीख सुनकर परिजन व ग्रामीण पहुंचे, लेकिन आग की लपटे देखकर अंदर घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सके। जब लोग आग बुझाकर बुजुर्ग के पास पहुंचे चारपाई पर कंकाल पड़ा मिला। बुजुर्ग की जिंदा जलकर मौत हो चुकी थी। परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने जांच की, शव पोस्टमार्टम भेजा।
कठारा गांव निवासी 90 वर्षीय गंगाप्रसाद खेती-किसानी करते थे, लेकिन मौजूदा कई माह से अस्वस्थ होने के कारण उठने-बैठने को लाचार थे। उनके पांच बेटे अरविंद, सुरेंद्र, वीरेंद्र, सत्येंद्र व रवि और दो बेटियां शादीशुदा हैं। अरविंद ने बताया कि मां शिवरानी की 10 साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। इन दिनों पिता सांस व घुटनों की बीमारी से पीड़ित थे। जिस कारण उन्हें बिस्तार से उठाना और लिटाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि सभी भाई अपने-अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं। सभी के मकान में गांव में ही आसपास बने हैं।
पिता पुराने मकान में अकेले रहते थे। जिनकी देखरेख सभी भाई करते हैं। अरविंद ने बताया कि पिता को बीड़ी की लत थी। सोमवार रात खाना खाने के बाद पिता सो गए थे, नींद टूटने पर देर रात बीड़ी पी और समीप में ही फेंककर सो गए होंगे। जिसके बाद सुलगती बीड़ी से कमरे में आग लग गई, कमरे से लपटें उठती देखकर परिजन व ग्रामीण शोर मचाते हुए दोड़े। बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास किया।
उस बीच पिता के चीखने की आवाज आ रही थी, जो कुछ देर में ही शांत हो गई। जब आग बुझाकर लोग अंदर पिता के पास तो जली चारपाई पर पिता का कंकाल मिला। हादसे की सूचना पर पहुंची बिधनू पुलिस ने जांच-पड़ताल की। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्र किए।
एक घंटे में बुझ सकी आग
पड़ोसी मुंशीलाल ने बताया कि ईंट की कच्ची दीवार पर पॉलिथीन व कपड़ा आदि डालकर रहने लायक बनाया गया था, जहां गंगा प्रसाद रहते थे। जब आग ने पॉलिथीन को पकड़ा तो बहुत ऊंची लपटें उठने लगी। जिससे समीप जाने की कोई हिम्मत नहीं कर सका। अगर गंगा प्रसाद चलने लायक होते तो बचाया जा सकता था। जलती हुई पॉलिथीन भी गलकर नीचे गिर रही थी, इसलिए और कोई अंदर नहीं गया।
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