रामोत्सव की भव्यता में डूबी नगरी.. बड़ी संख्या में उमड़े लोग, 25 मिनट में प्रज्वलित हुए 26 लाख

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Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार : दिव्य दीपोत्सव के पावन अवसर पर संपूर्ण अयोध्या धाम आस्था और विश्वास के साथ रामोत्सव के आनंद में गोते लगा रहा है। राम जन्मभूमि मंदिर से लेकर सरयू तट तक हर कोने में लाखों दीपों की ज्योति जगमगा रही है, जो भगवान राम की विजयी वापसी का प्रतीक बनी हुई है। रामपथ और धर्मपथ पर दीपोत्सव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी उत्साह से भरे सड़कों पर नजर आ रहे हैं।

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रामलला और हनुमान लला के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगीं। रामपथ पर पारंपरिक भजन-कीर्तन और रामचरितमानस का पाठ गूंजता रहा। धर्मपथ पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया।

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सरयू नदी के घाटों पर दीपों की मनोहर व्यवस्था ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु रेखा पटेल ने कहा यह रामराज्य का प्रतीक है, आस्था का अनुभव अविस्मरणीय है। पर्यटक विजय कुमार बोले अयोध्या की यह रौनक दुनिया में कहीं और नहीं।

25 मिनट में 56 घाटों पर प्रज्वलित हुए 26 लाख 17 हजार 253 दिए

अवध विश्वविद्यालय के 32 हजार स्वयं सेवकों ने दीपोत्सव में इस बार वह कर दिखाया जो केवल परिकल्पना ही कहा जा सकता है। 56 घाटों पर बिछाए गए 28 लाख दियों में से 26 लाख 17 हजार 253 दीपक मात्र 25 मिनट में प्रज्वलित कर दिए गए। यह वह दीपकों की संख्या है जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की 30 सदस्यों वाली टीम ने तीन ड्रोन की सहायता से शाम 6:45 बजे रिकॉर्ड की।

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दीपक जलाने का प्रारंभ करीब 5:29 बजे से शुरू हुआ, जो लगभग 6:15 बजे तक चला। नियंत्रण कक्ष से कहा गया इस अवधि में जले दीपकों की गणना गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने शुरू कर दी है लेकिन सभी अपने अपने घाटों पर लगातार दीप जलाते रहें।

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विवि के मीडिया प्रभारी आर के पांडेय ने देर शाम बताया कि 20 से 25 मिनट का समय गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम द्वारा दिया गया था। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय पर दीप प्रज्वलित कर लिए गए थे, कुछ घाटों पर कुछ दीपकों के जलने में दो से तीन मिनट अधिक लगे हो सकते हैं।

1100 स्वदेशी ड्रोन ने आकाश में रामायण के विविध प्रसंगों की पेश की झलकियां

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से राम की पैड़ी पर 1100 स्वदेशी ड्रोन ने आकाश में रामायण के विविध प्रसंगों की झलकियां पेश कीं। संगीत व रोशनी से सजे लेजर शो में प्रभु श्रीराम के जीवन व आदर्शों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से चित्रित किया गया। इसमें जयश्रीराम, धनुर्धारी श्रीराम, श्रीराम संग मां सीता, भैया लक्ष्मण, संकट मोचन हनुमान, पुष्पक विमान, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर जैसी अनेक मनमोहक आकृतियां शामिल रहीं।

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कई देशों से पहुंचे श्रद्धालु हुए अभिभूत : राम की पैड़ी और सरयू घाट पर दीपों की झिलमिलाहट, पुष्पवर्षा और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच विदेशी मेहमान भी खुद को रोक नहीं सके और उन्होंने भी मुक्त कंठ से जय श्रीराम के उद्घोष किए। रुस, पोलैंड, यूक्रेन, श्रीलंका सहित कई देशों से पहुंचे श्रद्धालु दीपोत्सव देख अभिभूत हो गए।

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पोलैंड की सिवोना बोली, अयोध्या के लोग बहुत खुश और फ्रैंडली हैं : पोलैंड से आई सिवोना ने कहा कि वे अपने दोस्तों के साथ पहली बार अयोध्या आई हैं। यहां के लोग हमेशा मुस्कुराते रहते हैं। बहुत खुशमिजाज और फ्रैंडली हैं। अयोध्या भले ही दिल्ली जैसा बड़ा शहर नहीं है, लेकिन यहां आकर हमें बहुत शांति और प्रसन्नता मिली।

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यूक्रेन की नतालिया बोलीं, अयोध्या बहुत अद्भुत है : यूक्रेन से आई नतालिया ने कहा कि यहां के लोग बेहद मिलनसार हैं। अयोध्या को देखकर मुझे बहुत अद्भुत अनुभव हुआ। यह स्थान शांति और सकारात्मकता से भरा है। कहा कि उन्होंने पहले कभी इतना बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन नहीं देखा। दीपों का यह समुद्र उन्हें किसी स्वर्गिक दृश्य जैसा लगा।

सरयू आरती बनी आस्था का महासमागम

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शाम होते ही राम की पैड़ी घाट पर मां सरयू की भव्य आरती शुरू हुई। जिसमें 2,100 श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। संस्कृत श्लोक सरयूतीरे शुभा आरती, भक्तिरेव प्रकाशिता।

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दीपज्योतिः समाराध्या, श्रीरामो हृदि वासते की गूंज से पूरा तट भक्तिमय हो गया। यह आरती न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सामूहिक आरती के लिए नया कीर्तिमान दर्ज करने वाली साबित हुई।

26 लाख दीयों से नया विश्व रिकॉर्ड

मुख्य आकर्षण था 56 घाटों पर 26 लाख से अधिक दीयों का एक साथ प्रज्वलन। राम की पैड़ी पर साढ़े चार लाख, लक्ष्मण किला घाट पर सवा चार लाख और भजन संध्या घाट पर साढ़े पांच लाख दीये जलाए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इससे पहले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए यह आयोजन दीपों की संख्या में नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर गया।

सतरंगी छटाओं से सजे रहे स्थल

रामकथा पार्क, हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, बिरला मंदिर, तुलसी उद्यान और सरयू ब्रिज को रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजाया गया। धर्मपथ पर 30 डिजिटल स्तंभ लगाए गए, जो रामायण के प्रसंगों को 3डी प्रोजेक्शन से प्रदर्शित कर रहे हैं। इसके अलावा, ड्रोन शो और लाइट एंड साउंड शो ने आकाश को राममय बना दिया।अयोध्या की गलियां भी दीप आकार की लाइटों से सजी हुई हैं। राम मंदिर परिसर से लेकर सरयू तट तक हर कोना आध्यात्मिक आभा से दमक रहा है।

अयोध्या के संतों ने सीएम योगी को बताया विक्रमादित्य का अवतार

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राम कथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में संतों के भी इस भव्य आयोजन को मंदिर निर्माण का प्रतीक बताया है। अयोध्या के विकास को देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विक्रमादित्य का दर्जा दिया। जगद्गुरु राघवाचार्य ने कहा कि अयोध्या बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ नौंवा दीपोत्सव मना रहा है।

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यह अयोध्या नगरी जिसका नाम तीनों लोकों में जाना जाता था। पिछली सरकारों ने इस अयोध्या को अंधकार के गर्त में डाल दिया था। जिसे लोग नाम भी नहीं लेना चाहते थे। जिस प्रकार से विक्रमादित्य ने इस अयोध्या को सजाने का क्या काम किया था, इस बार लगता है सम्राट विक्रमादित्य ही योगी आदित्यनाथ के रूप में पुनः आकर के अयोध्या को सजा रहे हैं।

जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि मैं सरयू के पावन तट पर ठाकुर जी के विग्रह के समीप दीपोत्सव का यह पर्व अब केवल अयोध्या का ना रहा बल्कि पूरे विश्व का पर्व बन चुका है। यह दीपोत्सव इसी अयोध्या ने पूरे विश्व को प्रदान किया है । वहीं श्री धराचार्य ने कहा कि आज त्रेता युग का स्मरण इस कलयुग में प्राप्त हो रहा है। सबसे भव्य दिव्य दीपोत्सव का आयोजन अयोध्या की हर गलियों में दिखाई दे रहा है। अयोध्या में भव्य दिव्य राम मंदिर की स्थापना हुई अब जो राम का नाम भी नहीं लेना चाहते थे और अयोध्या भी नहीं आना चाहते थे । वो लोग भी नकली वेश धारण कर, तिलक लगाकर और जनेव धारण कर मंदिर में जाकर पूजा करते है। वहीं कहा कि यह उत्तर प्रदेश अब उत्तम प्रदेश बन गया है। केवल भारत में ही नहीं विश्व के विश्व के अनेक देश के नेता कहते हैं हमारे देश में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसा हो।

इस कार्यक्रम में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चम्पतराय, जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर, जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य, जगद्गुरु राघवाचार्य, महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य, महंत कमल नयन दास, महंत धर्मदास, महंत शाशिकांत दास, महंत राजकुमार दास, महंत भरत दास समेत बड़ी संख्या में साधु संत मौजूद रहे।

मंदिर की पूर्णता के साथ-साथ अयोध्या लिख रही नई-नई इबारतें

श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या नई-नई इबारतें लिख रही है। सप्त मंदिरों के साथ संस्कृति का नया अध्याय लिखने की कोशिश की गई। अयोध्या में अब राम लला के साथ राजा राम के भी दर्शन होंगे। दक्षिण के तीन श्रेष्ठ संतों की मूर्ति स्थापना के साथ नए सिरे से सांस्कृतिक रूप से उत्तर से दक्षिण तक को एक करने की कोशिश शुरू की गई। श्री राम मंदिर के शीर्ष पर ध्वज पताका फहराने की तैयारी है। यह कई मायनों में अयोध्या से मुनादी भी होगी। दीपोत्सव इन सब से अलग नहीं है। यह उत्प्रेरक का काम कर रहा है।

उत्तर से दक्षिण तक को सांस्कृतिक एकत्व की शुरू हुई कोशिश

दीपोत्सव अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान बन गया है। विश्व के लोगों को वहीं बैठे-बैठे देखने और समझने का अवसर देता है। अब अयोध्या में विरासत और विकास के संगम में एक नहीं कई नए अध्याय जुड़ गए। श्री राम मंदिर निर्माण ने अयोध्या के साथ सनातन में नई चेतना भर दी। सनातन शाश्वत है लेकिन काल का प्रभाव सब पर पड़ता है। श्री राम मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ संस्कृति के बहु आयाम सामने आए।

साल 2017 में शुरू हुए दीपोत्सव ने नई ऊर्जा का संचार शुरू किया। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या के विकास का दौर शुरू हुआ। श्रीराम मंदिर के जरिए देश में सांस्कृतिक एकता के नए सिरे से सूत्रपात का अनुभव किया गया। धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में विकास रेखांकित किया गया। श्री राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ा। इसने अयोध्या को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में नए सिरे से स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया। संत राम दास कहते हैं कि बहुत बदली दिखती है अयोध्या। दर्शन करने आए और दीपोत्सव देख रहे संदीप परांजपे कहते हैं कहां आंदोलन और अब आनंद का दौ्र। तुलना नही की जा सकती है।

दीपोत्सव में सांस्कृतिक दृष्टि से कई रिकॉर्ड बने। यहां पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 2017 में 21 हजार दीये नहीं मिल रहे थे। आज 26 लाख से ज्यादा दीये जलाए जा रहे हैं। संस्कृति छोटे-छोटे प्रतीकों से निर्मित होती है। मंदिर निर्माण पूर्णता की ओर है। नवंबर में श्री राम मंदिर के शीर्ष पर ध्वज पताका लहराया जाएगा। इसे एक झंडा भर नहीं कहा जा सकता है। यह वैश्विक स्तर पर अयोध्या से नि:सृत होने धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के पुनरुत्थान का ध्वज होगा। यह ध्वज अयोध्या के सांस्कृतिक राजधानी बनने और देश के एकत्व का प्रतीक भी होगा। इसकी यह अघोषित घोषणा होगी। ऐसा लोगों का मानना है।

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