दिवाली बाद यूपी की हवा में घुला जहर... कई शहरों की हवा जहरीली, लखनऊ समेत पश्चिमी यूपी पर वायु संकट
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में दिवाली बाद वायु प्रदूषण चरम पर है, ऐसे में कई शहरों की हवा जहरीली हो गई है। राज्य के दस प्रमुख शहरों की एक्यूआई की स्थिति तो चिंताजनक है। इनमें लखनऊ, मेरठ, मुज्जफरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, मुरादाबाद, कानपुर, प्रयागराज, आगरा और बरेली शामिल हैं। खासकर दिल्ली से सटे उप्र. के शहरों में वायु प्रदूषण का संकट गहराया हुआ है। कुलमिलाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आबोहवा ज्यादा बदतर है।
दरअसल, प्रदेश के कई शहरों में दीपावली पर दो दिन तक हुई आतिशबाजी ने हवा में जहर घोल दिया है। इस कारण प्रदूषण इस कदर बढ़ा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दो दिन में ही काफी बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत भी है।
गुरुवार को कई शहरों में वायु गुणवत्ता खराब और बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। जबकि पड़ोसी राज्य दिल्ली से सटे कई इलाकों में बहुत खराब स्थिति दर्ज की गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की साइट पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, उप्र. के मेरठ जिले में सुबह 10 बजे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 332 दर्ज किया गया। जबकि हापुड़ जिले का 244 और बुलंदशहर का 214 दर्ज किया है। वहीं, राजधानी लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 211 दर्ज किया गया है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की नजर से मेरठ का 332 मुज्जफरनगर का 277, हापुड़ का 244, बुलंदशहर का 214, लखनऊ का 211, मुरादाबाद का 185, कानपुर का 183, प्रयागराज का 175, आगरा का 173 और बरेली का एक्यूआई 153 दर्ज किया गया है।
मानक देखें तो 0-50 की एक्यूआई रीडिंग को अच्छा, 51-100 को संतोषजनक, 101-200 को मध्यम प्रदूषित, 201-300 को खराब, 301-400 को बहुत खराब जबकि 401-500 को गंभीर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सांस संबंधी दिक्कतों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
खराब स्थिति में दस शहरों को एक्यूआई
उत्तर प्रदेश में दिवाली बाद वायु प्रदूषण चरम पर है, ऐसे में कई शहरों की हवा जहरीली हो गई है। राज्य के दस प्रमुख शहरों की एक्यूआई की स्थिति तो चिंताजनक है। इनमें लखनऊ, मेरठ, मुज्जफरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, मुरादाबाद, कानपुर, प्रयागराज, आगरा और बरेली शामिल हैं। खासकर दिल्ली से सटे उप्र. के शहरों में वायु प्रदूषण का संकट गहराया हुआ है। कुलमिलाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आबोहवा ज्यादा बदतर है।
दरअसल, प्रदेश के कई शहरों में दीपावली पर दो दिन तक हुई आतिशबाजी ने हवा में जहर घोल दिया है। इस कारण प्रदूषण इस कदर बढ़ा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दो दिन में ही काफी बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत भी है।
खासकर दिल्ली से सटे उप्र. के शहरों में गहराया वायु प्रदूषण का संकट
गुरुवार को कई शहरों में वायु गुणवत्ता खराब और बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। जबकि पड़ोसी राज्य दिल्ली से सटे कई इलाकों में बहुत खराब स्थिति दर्ज की गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की साइट पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, उप्र. के मेरठ जिले में सुबह 10 बजे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 332 दर्ज किया गया। जबकि हापुड़ जिले का 244 और बुलंदशहर का 214 दर्ज किया है। वहीं, राजधानी लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 211 दर्ज किया गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आबोहवा ज्यादा खराब
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की नजर से मेरठ का 332 मुज्जफरनगर का 277, हापुड़ का 244, बुलंदशहर का 214, लखनऊ का 211, मुरादाबाद का 185, कानपुर का 183, प्रयागराज का 175, आगरा का 173 और बरेली का एक्यूआई 153 दर्ज किया गया है।
मानक देखें तो 0-50 की एक्यूआई रीडिंग को अच्छा, 51-100 को संतोषजनक, 101-200 को मध्यम प्रदूषित, 201-300 को खराब, 301-400 को बहुत खराब जबकि 401-500 को गंभीर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सांस संबंधी दिक्कतों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
