मानसिक बीमारी से हूं ग्रसित, अशोभनीय शब्दों के लिए करें माफ... CMO को सोहावल सीएचसी की बीसीपीएम ने दिया बिंदुवार जवाब

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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अयोध्या, अमृत विचार : सोहावल सीएचसी की बीसीपीएम नेहा सिंह ने सीएमओ के आरोप पत्र पर जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह वर्तमान समय में गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं। मनोचिकित्सक के द्वारा काउंसिलिंग की जा रही है। इस स्थित में मानसिक विकार के कारण इंसान से बोल चाल अथवा भाषा के सही उल्लेख करने में गलती होने की संभावना रहती है। यदि कोई अशोभनीय शब्द उजागर हुए हो तो इसके लिये वह माफी मांगती हैं।

दरअसल तीन अक्टूबर को सोहावल सीएचसी में हुए बवाल को लेकर सीएमओ डॉ.सुशील कुमार बानियान ने दूसरे दिन ही आठ बिंदुओं पर आरोप पत्र जारी किया गया था। इसमें आशाओं का नेतृत्व करते हुए उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार के समक्ष गंदी गन्दी गालियों एवं अलोकतांत्रिक और अमर्यादित ढंग से व्यवहार समेत अन्य बातों का जिक्र था। इस पर बीसीपीएम नेहा ने आठ अक्टूबर को सीएमओ को संबोधित पत्र में बिंदुवार लिखा है कि सीएचसी सोहावल का जो भी व्हाट्सएप ग्रुप है उसका इस्तेमाल केवल सूचनाओं को साझा करने एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं के निराकरण व स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित गतिविधियों आदि के लिये उपयोग किया जाता है। मेरे द्वारा अपने पद के गरिमा/आचरण के विपरीत कार्य नहीं किया गया है। टीकाकरण कार्ययोजना पूर्व में ही बनायी जाती है, जिसमें समस्त एएनएम और आशा को अपने टीकाकरण सत्र स्थल की जानकारी से पहले ही सूचित करा दिया जाता है। मेरे द्वारा आशा संगिनियों से प्रतिमाह 100/200 रुपये लेने की जो शिकायत की गयी थी। उस शिकायत का आरोप पत्र मुझे आज तक नहीं प्राप्त हुआ। वर्ष 2017-18 में माह जुलाई एवं अगस्त के अवधि में मेरी तैनाती मया बाजार सीएचसी पर थी। उक्त अवधि का आशाओं का कोई भी कलस्टर बैठक का भुगतान लम्बित नहीं। आशाओं के धरने पर बैठने का कारण वहां की चिकित्सा व्यवस्था थी।

मेरे द्वारा गभर्भावस्था के अवकाश के लिए जो भी आवेदन किया गया था उसमें अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और चिकित्सक के पर्चे पर गर्भ के संख्या का उल्लेख था। उक्त अवकाश की स्वीकृति आवेदन के परीक्षण उपरांत आपके स्तर से शासकीय नियमों के अधीन प्रदान की गई है। सोहावल में मेरे नाम से कोई भी आवास लिखित रूप से न तो आवंटित किया गया है और न ही निवास करने का कोई लिखित आदेश निर्गत है।

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