एआई से कृषि में क्रांति... 15 करोड़ किसानों को मिलेगा फायदा, इन राज्यों में दिख रहा असर
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में खेती के तरीकों में बड़ा बदलाव आ रहा है। अगर इसे पूरे देश में अपनाया जाए तो 15 करोड़ से ज्यादा किसानों की आय बढ़ सकती है और कृषि उत्पादन में क्रांति आ सकती है।
प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने हाल ही में 'फ्यूचर फार्मिंग इन इंडिया: ए प्लेबुक फॉर स्केलिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन एग्रीकल्चर' नामक रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट चौथी औद्योगिक क्रांति (सी4आईआर) भारत और विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सहयोग से तैयार की गई है। इसमें देश-दुनिया की पायलट परियोजनाओं के नतीजों का विश्लेषण किया गया है।
तेलंगाना का सफल उदाहरण
तेलंगाना के 'सागु बागु' प्रोजेक्ट में एआई का इस्तेमाल करने वाले 7,000 मिर्च किसानों की पैदावार एक सीजन में 21% बढ़ी।
- उर्वरक खर्च 9% कम हुआ
- फसल की कीमत 11% ज्यादा मिली
- प्रति एकड़ अतिरिक्त मुनाफा 800 डॉलर (लगभग 70,000 रुपये)
आंध्र प्रदेश में भी कमाल
एआई-आधारित सलाह से किसानों की पैदावार 30% तक बढ़ी। कीट प्रकोप की पूर्व चेतावनी से 3,000 किसानों की फसल बची।
रिपोर्ट कहती है कि एआई कम उपज, मौसम की मार और बाजार की दिक्कतों से निपटने में कारगर है। यह किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ सकता है और कृषि जीडीपी को मजबूत बना सकता है।
भारतीय कृषि की चुनौतियां और एआई का समाधान
- छोटी जोतें
- कर्ज की कमी
- जलवायु परिवर्तन
- कम उत्पादकता
रिपोर्ट में इन्हें दूर करने के लिए एआई को परिवर्तनकारी हथियार बताया गया है।
एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने का रोडमैप
रिपोर्ट तीन स्तंभों पर आधारित है:
1. इनेबल (समर्थन) – सरकारें मजबूत डिजिटल ढांचा और नीतियां बनाएं
2. क्रिएट (निर्माण) – स्टार्टअप्स और शोध संस्थान वास्तविक समस्याओं का हल निकालें
3. डिलीवर (पहुंच) – किसानों को ट्रेनिंग, फीडबैक और बाजार तक पहुंच
चार प्रमुख सिफारिशें
1. सही फसल चयन – मिट्टी, मौसम, कीमत और वैश्विक डेटा के आधार पर
2. स्मार्ट उर्वरक प्रबंधन – मिट्टी की सेहत के अनुसार खाद का इस्तेमाल
3. कीट प्रकोप पूर्वानुमान – समय पर दवा का छिड़काव
4. स्मार्ट मार्केटप्लेस – सही कीमत और बाजार जानकारी
वैश्विक बाजार का अवसर
2022 में वैश्विक एआई बाजार 136 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 1,800 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। भारत इसका बड़ा हिस्सा लेने की तैयारी में है।
रिपोर्ट में शुरुआती सफलताएं एआई की ताकत दिखाती हैं, लेकिन असली चुनौती है। इसे लाखों छोटे किसानों तक पहुंचाना। इसके लिए सरकार, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को एकजुट होकर काम करना होगा।
