जब अपने साथ छोड़ देते हैं तो प्रभु देते सहारा : देवकी नंदन ठाकुर
विश्व शांति सेवा समिति के तत्वावधान में मोतीझील में श्रीमद्भागवत कथा
कानपुर, अमृत विचार। संसार में भगवान श्रीकृष्ण के अतिरिक्त हमारा कोई नहीं है। वही हमारे सच्चे साथी, सच्चे मित्र और सच्चे रक्षक हैं। जब दुनिया साथ छोड़ देती है, जब अपने भी पराए बन जाते हैं, तब भी केवल भगवान ही हैं जो हमारे साथ खड़े रहते हैं। इसीलिए हमें हमेशा श्रीकृष्ण पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वे हमारे थे, हमारे हैं और हमारे रहेंगे। हमें अपनी मातृभाषा हिंदी से भी प्रेम करना चाहिए।
यह केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और हमारी पहचान है। जो व्यक्ति अपनी भाषा का सम्मान करता है, वही अपने देश और अपनी परंपरा का सच्चा सम्मान करता है। आज जब लोग विदेशी भाषाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब हमें गर्व से कहना चाहिए कि हमारी मातृभाषा ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। ये बातें देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने विश्व शांति सेवा समिति के तत्वावधान में मोतीझील में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी जीव की हत्या करना पाप है। जीव चाहे छोटा हो या बड़ा, सभी में परमात्मा का अंश विद्यमान है। इसलिए हमें हर जीव पर दया करनी चाहिए, करुणा रखनी चाहिए। यही सच्चा धर्म है। जब हम जीवों पर दया करना सीख लेते हैं, तभी हमारा हृदय भगवान के निकट पहुंचता है।
आज के समाज में यह दुर्भाग्य की बात है कि यदि कोई व्यक्ति अच्छा कार्य भी करता है, तो भी लोग उसकी आलोचना करने, उसकी खिल्ली उड़ाने से पीछे नहीं हटते। लेकिन हमें ऐसे लोगों की बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। अच्छे कर्म का फल सदैव शुभ होता है चाहे संसार उसे तुरंत न देखे, परंतु भगवान सब देखते हैं। मनुष्य तो केवल स्वार्थवश हमारे साथ जुड़ता है। जब तक उसे लाभ मिलता है, वह हमारे पास रहता है, और जैसे ही स्वार्थ समाप्त होता है, वह दूर चला जाता है।
संसार में संबंध अक्सर जरूरतों पर टिके होते हैं, परंतु भगवान ऐसे नहीं हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के हमसे प्रेम करते हैं। उनका स्नेह न तो लाभ देखता है, न परिस्थिति। जब कोई कथा सुनने के बाद तुम्हारे हृदय में भगवान के प्रति प्रेम जाग्रत होने लगे, जब तुम्हारा मन संसारिक विषयों से हटकर भगवद्-स्मरण में रमने लगे, तो समझ लेना कि तुम सही मार्ग पर चल रहे हो।
यही वह दिशा है, जो मनुष्य को मोक्ष और सच्चे सुख की ओर ले जाती है। इस अवसर पर शिव प्रकाश गुप्ता, जयमाला सिंह, प्रभा शकर वर्मा, पूनम पाण्डेय, विपिन बापजेई, डा. यूपी सिंह, राम विनय यादव, सतीश गुप्ता, अजय मिश्रा, अनिल श्रीवास्तव, नीरज वर्मा, रानी अवस्थी, वीरेन्द्र गुप्ता, नीलम सेंगर, माया सिंह, आभा गुप्ता, मीना शुक्ला, निर्मला त्रिपाठी, किरन तिवारी, अनु सेंगर, चन्द्र प्रभा मौजूद रहीं।
