नारी कैंसर सुरक्षा अभियान : दस में एक महिला में स्तन कैंसर के लक्षण, तीसरी या चौथी स्टेज पर डॉक्टर पास जाते हैं लोग
बरेली, अमृत विचार। भारत में हर साल लाखों महिलाओं का मौत का कारण स्तन कैंसर है। बावजूद इसके महिलाएं कैंसर पर बात करने से आज की कतराती हैं, हैरत की बात ये है अस्पतालों में आने वाली हर 10 महिलाओं में से एक में स्तन कैंसर के लक्षण मिल रहे हैं।
बीएल इंटरनेशनल स्कूल में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रारब्ध सिंह ने छात्राओं को स्तन कैंसर की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकांश मरीज डॉक्टर से तब संपर्क करते हैं जब उनका कैंसर तीसरी या चौथी स्टेज पर आ जाता है। ऐसे में मरीज को इलाज के दौरान तमाम जोखिम का भी सामना करना पड़ता है। ऐसा होता है जागरूकता का अभाव होने से, इसलिए स्तन कैंसर की पहचान खुद की जा सकती है।
इसको बीएसई यानि ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन कहा जाता है। ऐसा करने से काफी हद तक स्तन कैंसर की समय पर पहचान हो सकती है। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता सिर्फ जानकारी रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सक्रिय कदम उठाना जरूरी है। अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान दें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नियमित जांच करवाना न भूलें। थोड़ी-सी जागरूकता और समय पर जांच आपकी जिंदगी के कई साल बचा सकती है। इससे पहले स्कूल के निदेशक योगेश गुप्ता ने डा. प्रारब्ध सिंह और अमृत विचार के सीओओ पार्थो कुनार का स्वागत और प्रतीक चिह्न भेंट कर किया। उन्होंने रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट और अमृत विचार की कैंसर जागरूकता की पहल की सराहना भी की।
आप हैं कल का भविष्य, इसलिए तोड़नी होगी चुप्पी : पार्थो कुनार
अमृत विचार के सीओओ पार्थो कुनार ने भी छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों को स्कूलों में आयोजित करने का मुख्य कारण ये है कि आप बेटियां कल का भविष्य हैं, इसलिए अब कैंसर पर बात कर इससे बचाव के प्रति जागरूक होकर चुप्पी तोड़नी होगी। छात्राओं को जागरूक करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
