बाराबंकी वेदर अपडेट : बेमौसम बारिश से गिरा पारा बढ़ी ठंडक, किसान बेहाल
बाराबंकी, अमृत विचार: मानसून की विदाई के बाद भी हो रही बारिश ने पारा तो लुढ़काया ही साथ ही किसानों को सिर पर हाथ धरने को मजबूर कर दिया है। एक ओर पारा गिरने से ठंडक का एहसास बढ़ा और पंखे तक बंद हो गए तो दूसरी ओर खेत की ओर निहारते किसान के सामने फसल कटाई व बोवाई दोनों खतरे में नजर आ रही। इस बीच खेत में पड़ी धान की फसल के सड़ने की आशंका बलवती हो गई। बारिश जारी रही और हवा का साथ मिला तो फसल तबाह हो जाएगी।
मानसून के गुजर जाने के बाद हो रही बेमौसम बारिश को मोंथा चक्रवात का असर बताया जा रहा। आमजन भी इस बारिश को लेकर चौकन्ने हो गए हैं। लगातार मौसम के उतार चढ़ाव और सेहत पर विपरीत असर की यह एक और कड़ी है। एक दिन पूर्व बारिश बाद धूप निकली और दिन में गर्मी जैसा एहसास रहा तो बुधवार की देर रात से बादलों ने आसमान पर ऐसा कब्जा जमाया कि गुरुवार की शाम तक रुक रुक कर बारिश होती रही। शहर में सन्नाटा पसरा रहा और लोग जरूरी काम से ही बाहर निकले।
स्कूली बच्चे भी जाते व लौटते हुए बारिश से भीगते नजर आए। दिन का तापमान लुढ़क कर 25 डिग्री तक पहुंच गया वहीं यातायात भी सिमटा नजर आया। सबसे बड़ी मुसीबत किसानों के सामने आन खड़ी हुई है। देर से धान लगाने वाले किसानों के खेतों में पड़े बोझ बारिश से भीग गए हैं, बारिश लगातार हुई और हवा का साथ मिला तो इसे सड़ने से कोई रोक नहीं पाएगा।
वहीं खड़ी फसल ज्यादा पानी न बरसने से बच जाएगी। इसी तरह आलू, राई व सरसों के जमाव में देरी करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बारिश के बावजूद किसान खेत पर नजर बनाए हुए हैं। आलू बोने जा रहे किसानों ने बारिश होते ही कदम पीछे खींच लिए। आसमान की ओर ताकता किसान रहम की आस लगाए है।
उपकृषि निदेशक प्रसार डीके सिंह ने बताया कि अभी बारिश नुकसान करने की स्थिति में नही है लेकिन अधिकता होने व हवा का साथ मिलने पर फसल खतरे में पड़ सकती है। आलू, राई सरसों के जमाव होने की दशा में नुकसान न के बराबर है।
