प्रदेश में मृतक, फर्जी, डुप्लीकेट वोटर्स के लिए बनेगा 'काल'... BLO करेंगे घर-घर सर्वे
अयोध्या, अमृत विचार: मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान सूची में शामिल डुप्लीकेट मतदाता खोजे जाएंगे। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में यह काम खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीएलओ के साथ दलों के बीएलए से इसमें बेहतर सहयोग की अपील की जा रही है। एक जनवरी 2025 को 18 साल पूरी कर चुके युवक और युवतियां भी अभियान के दौरान मतदाता बन पाएंगे।
नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए आयोग से पुनरीक्षण अभियान तो हर साल चलाया जाता है। अमूमन यह अभियान सितंबर से दिसंबर के बीच चलाया जाता है। मकसद मृतक या स्थान परिवर्तन कर गए मतदाताओं को नए सिरे से सूची में शामिल करना होता है।
साथ ही एक जनवरी को 18 साल की आयु पूरी करने वाले युवाओं को सूची में शामिल करना होता है। लेकिन इस बार पुनरीक्षण अभियान कुछ खास है। इसका कारण देश में चल रहा मतदाताओं का आंकड़ा है। मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या को लेकर सियासी तूफान है। खासतौर से बिहार चुनाव को लेकर हाय तौबा मची थी। सूची की खामी अहम् मुद्दा रहा।
कारण जो भी हो लेकिन मतदाताओं और पुनरीक्षण में लगे लोगों की लापरवाही इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। एक तो मृत या शिफ्टेड मतादाता इसकी जानकारी नहीं देते, दूसरे मतदाता पुनरीक्षण की खानापूर्ति। पुनरीक्षण में लगे बीएलओ घर-घर जाने के बजाए किसी एक स्थान और कुछ व्यक्तियों से जानकारी के आधार पर सूची को अपडेट करते रहे।
हालांकि आनलाइन प्रासेस से अब संवेदनशीलता थोड़ी बढ़ी लेकिन मृतक मतदाताओं के नाम सूची में होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसी तरह सूची के ड्राफ्ट तैयार करने और इसका परीक्षण करने की खानापूर्ति भी बड़ा कारण रहा। सूची में नाम बढ़ाने की ठेकेदारी प्रथा के चलते डुप्लीकेट मतदाता बरकरार रह जाने से सूची के मतदाताओं का आंकड़ा तो बढ़ जाता है लेकिन वास्तव में सूची अपडेट नहीं होती। केवल फोकस नए मतदाताओं का नाम बढ़ाने पर होता है। अतीत में नाम बढ़वाने और फोटो आईडी के लिए लोग भटकते रहते थे।
सियासी हलचल के बाद आयोग से प्रशासन तक सक्रिय हुए हैं। इस बार फोकस बढ़ा है। मतदाता सूची को अपडेट किए जाने में गड़बड़ी न होने देने के प्रयास भी हैं लेकिन यह खासतौर से बीएलओ की सक्रियता पर निर्भर करेगा। इसीलिए राजनीतिक दलों की बैठक में विभाग के अफसरों ने बीएलए की सक्रियता की अपील की जिससे नए मतदाता बनाए जाने के साथ डप्लीकेट मतदाता चिंहित किए जा सकें।
अयोध्या में चिंहित किए गए थे 30 हजार डुप्लीकेट मतदाता
अयोध्या में लगभग 22 साल पहले लगभग 30 हजार डुप्लीकेट मतदाता चिंहित किए गए थे। आयोग में शिकायत के बाद बारत निर्वाचन आयोग के सचिव ने यहां का दौरा किया। इसके बाद आयोग की टीमों ने मोहल्लों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया तो पता चला कि एक परिवार के मतदाता दो परिवारों में दर्ज हैं। इन्हें चिंहित कर सूची से हटाया गया। अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं संख्या लगभग 3.02 लाख से गिरकर 2.70 लाख पर पहुंच गई थी।
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