यूपीएएसआई कॉन-2025 -2 : टेली रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने से नहीं जाना पड़ेगा विदेश
विदेश के डॉक्टर कानपुर व कानपुर के डॉक्टर विदेशी मरीज की कर सकतें है सर्जरी
कानपुर, अमृत विचार। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अब आने वाला भविष्य रोबोट का होगा, क्योंकि यह पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सटीकता, लचीलापन और नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे जटिल प्रक्रियाएं आसानी से की जा सकती हैं। इसमे छोटे चीरे, कम रक्त हानि, कम दर्द, अस्पताल में कम रुकना और तेज रिकवरी, जो मरीजों के लिए बेहतर परिणाम मिलते हैं।
वहीं, अब टेली रोबोटिक सर्जरी भी काफी कारगर साबित हो रही है, जिसके जरिए विदेश में बैठा डॉक्टर भी कानपुर या आगरा में जटिल सर्जरी कर सकते हैं। वहीं, भारत के डॉक्टर विदेश में सर्जरी कर सकते हैं। यह जानकारी आगरा से आए डॉ.अंकुर बंसल ने दी।
डॉ.अंकुर ने बताया कि टेली रोबोटिक सर्जरी की खासीयत ये हैं कि जो लोग विदेश जाकर ऑपरेशन कराते हैं, उनका इलाज के साथ ही आने व जाने का खर्च भी बढ़ता है, लेकिन टेली रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से आने व जाने का खर्च बचेगा। वहीं, विदेश के जिस डॉक्टर से संबंधित मरीज सर्जरी कराना चाहते हैं, वह उनसे करा सकते हैं।
यह सुविधा सभी मेडिकल कॉलेजों में होना जरूरी है।
वहीं, एआई युक्त रोबोट का लाभ मरीजों को इस कदर मिलेगा कि जिस क्षतिग्रस्त नस को एआई युक्त रोबोट मरम्मत करना चाहता है, सिर्फ उसी नस पर रोबोट कम करेगा। पास की सभी नस सुरक्षित रहेगा। केजीएमयू से आए डॉ.अवनीश कुमार ने बताया कि लोगों में एक भ्रम है कि रोबोटिक सर्जरी रोबोट द्वारा की जाती है, लेकिन यह गलत है।
सर्जरी एक प्रशिक्षित सर्जन करता है, जो रोबोट को चलाता है। रोबोट की वजह से डॉक्टरों के हाथों में जो कंपन होता है, वह नहीं होता है। कैमरे से स्थितियां सर्जन के कंट्रोल में रहती है। इससे सटीकता व गुणवक्ता बढ़ती है। बताया कि भविष्य में रोबोट का दायरा बढ़ेगा। वर्तमान में सर्जरी, आर्थो, नेत्र रोग, हृदय व मस्तिष्क रोग में अलग-अलग प्रकार के रोबोट का इस्तेमाल हो रहा है।
50 फीसदी ठीक हो रहे कैंसर रोगी
डॉ.हारित चतुर्वेदी ने बताया कि कैंसर के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ी है। इस कारण अब कैंसर क्योर रेट यानी ठीक होने की दर 50 फीसदी हो गई है। जबकि पहले यह दर 20 से 25 फीसदी ही थी। इसकी मुख्य ये है कि जागरूकता अभियान के जरिए बताए लक्षणों को भापकर या संबंधित कोई समस्या होने पर नई तकनीक की मशीनों के कारण जांच में पता लग जाता है। इस वजह से कैंसर को पहले या दूसरे स्टेज में ही पकड़ लिया जाता है। वहीं, अब कई ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी में ब्रेस्ट को काटना भी नहीं पड़ता है, बहुत ही गंभीर स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए काटना पड़ता है।
डॉ. मुकुल खेतान ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ बताए। कहा कि लेप्रोस्कोप नामक एक पतले, ट्यूब जैसे उपकरण की मदद से न्यूनतम इनवेसिव कीहोल सर्जरी करता है। इस तकनीक में पारंपरिक ओपन सर्जरी के बड़े चीरे के बजाय छोटे-छोटे चीरे लगाकर, शरीर के अंदरूनी अंगों का इलाज किया जाता है। लेप्रोस्कोप में एक कैमरा और लाइट होती है, जिससे सर्जन स्क्रीन पर अंगों को देख सकता है और छोटे उपकरणों की मदद से ऑपरेशन कर
गाल ब्लैडर में पथरी से हो सकता कैंसर
डॉ. एएस सेंगर ने बताया कि गाल ब्लैडर में पथरी से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि लंबे समय तक पथरी रहने से क्रॉनिक सूजन बाद में कैंसर का रूप ले सकती है। हालांकि, पित्त की पथरी वाले अधिकांश लोगों को गाल ब्लैडर कैंसर नहीं होता है। बड़े आकार की पथरी या फिर संयोगवश सर्जरी के बाद इसका पता चलना संभव है। कई मामलों में गाल ब्लैडर कैंसर का पता तब चलता है, जब पथरी या अन्य समस्याओं के कारण पित्ताशय को निकालने की सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टोमी) की जाती है और बाद में उसकी बायोप्सी की जाती है।
वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. विकास शुक्ला ने बताया कि ऐसे सम्मेलन से डॉक्टरों में सीखने की ललक बढ़ती है। सम्मेलन में वरिष्ठों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद डॉक्टर उन विधियों का इस्तेमाल मरीजों पर करते हैं, जिसकी वजह से मरीज के स्वस्थ होने की दर बढ़ जाती है। बताया कि सर्दी के मौसम में स्ट्रोक की समस्या लोगों में बढ़ जाती है, ऐसे में लोगों को बचाव जरूर करना चाहिए।
