Pilibhit: विहिप संगठन मंत्री को जेल भेजने का मामला गरमाया, प्रांत संगठन मंत्री ने कार्रवाई पर उठाए सवाल 

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। एडीएम की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में गिरफ्तार कर कोतवाली से जेल भेजे गए विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ की देर रात जेल में अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहीं, मामला तूल पकड़ गया है। विश्व हिंदू परिषद के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पीलीभीत पहुंचकर अस्पताल में भर्ती संगठन मंत्री से मुलाकात की। शासन स्तर पर भी इस मामले को अवगत कराया गया है।

प्रकरण से संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। आज इस मामले में डीएम-एसपी से भी मुलाकात की जाएगी। इस दौरान भाजपा के भी तमाम नेता मेडिकल कॉलेज पहुंचे और हालचाल जाना। इस मामले में मुकदमा निरस्त कराने से लेकर संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर भी मांग शासन स्तर पर रखी गई है। बता दें कि एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया की ओर से कोतवाली में विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री शाजीपुर प्रभाग  प्रिंस गौड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कई संगीन आरोप लगाए गए थे। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने आरोपी प्रिंस गौड़ को शनिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विहिप के संगठन मंत्री के जेल भेजे जाने की कार्रवाई तेजी से चली और इसकी भनक भी अन्य कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों की मानें, तो उन्हें लग ही नहीं सकी। 

 इधर, देर रात जेल भेजे गए प्रिंस गौड़ की तबीयत बिगड़ी, उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी भर्ती कराया गया। उधर, मामला शासन स्तर तक पहुंचा और तूल पकड़ चुका है। विहिप के पदाधिकारी भी इस कार्रवाई को गलत करार देते रहे। रविवार दोपहर को पहले विभाग संगठन मंत्री बरेली एवं प्रांत सह धर्म प्रचार प्रमुख देवेंद्र सोम पीलीभीत पहुंचे। अस्पताल में भर्ती विहिप नेता प्रिंस गौड़ से मुलाकात की। इस दौरान मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने बिना नाम लिए एक अधिकारी पर संगीन आरोप लगाए। उनका कहना था कि संबंधित अधिकारी के बदायूं, बरेली में हुई पोस्टिंग के दौरान जो भी भ्रष्टाचार किया है, उसका पूरा चिट्ठा उनके पास है। किस अधिकारी के पति ठेकेदारी भी कर रहे हैं, उनको कैसे टेंडर दिलवाए जाते हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार है। 

यह सिर्फ एक -आध अधिकारी का नहीं, कई ऐसे अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए हिंदू संगठनों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की शासन स्तर पर शिकायत की गई। उनके स्थानांतरण की मांग की है। देर शाम विहिप के प्रांत संगठन मंत्री राजेश भी पीलीभीत पहुंचे। पूर्व विहिप जिलाध्यक्ष एवं भाजपा नेता दीपक  अग्रवाल,  भाजपा नगराध्यक्ष इंद्रेश चौहान, मीडिया प्रभारी स्वतंत्र  देवल,  जगदीश सक्सेना, अमित गुप्ता, हिंदू महासभा जिलाध्यक्ष पंकज शर्मा समेत कई नेता अस्पताल में मौजूद थे। प्रांत संगठन मंत्री ने पहले अस्पताल में भर्ती प्रिंस गौड़ से मुलाकात की और फिर मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में जिले से लेकर शासन स्तर तक के अधिकारियों से संपर्क कर पूरी बात रखी गई है। दो तीन दिन तक प्रशासनिक कार्रवाई देखी जाएगी और फिर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। यह भी बताया कि इस मामले में वह सोमवार को डीएम-एसपी से भी मुलाकात करेंगे। कार्यकर्ता समाज के लिए कार्य कर रहा है, उसके सम्मान की लड़ाई लड़ी जाएगी। 

हाईवे से उठाकर कोतवाली लाए और भेज दिया जेल
अस्पताल में भर्ती विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ का कहना था कि उन्हें खुद पर दर्ज मुकदमे की कोई भनक नहीं थी। इस संबंध में कुछ भी पता नहीं चला। वह बदायूं से लौट रहे थे। बरेली हाईवे पर शाही चौकी के पास से ही उन्हें पुलिस ने पकड़ा और कोतवाली ले गई। फिर वहीं से सीधे चालान कर दिया गया। तब जाकर पता चला कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ये भी आरोप लगाया कि उन पर पूर्व में कमिश्नर से की गई शिकायत वापस लेने का दबाव था।

प्रांत संगठन मंत्री, विहिप  राजेश ने बताया कि प्रिंस गौड़ ने एक मामले में एडीएम की शिकायत कमिश्नर से की थी। ऐसा लोकतंत्र में होता रहता है। उस शिकायत पर जांच होनी चाहिए थी। इन्होंने भी शिकायत में किसी पर एफआईआर नहीं कराई थी , सिर्फ जांच की मांग की थी। मगर जिस तरह से मुकदमा दर्ज किया और जेल भेज दिया गया। वह गलत है।  ऐसी कार्रवाई की गई जैसे कोई आतंकवादी पर की जा रही हो। शासन स्तर पर भी अवगत कराया है। डीएम-एसपी से भी मुलाकात करेंगे।

भाजपा नेता ने डीएम -एसपी को लिखा पत्र
भाजपा प्रदेश परिषद सदस्य  एवं विहिप के पूर्व जिलाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने भी इस मामले में डीएम-एसपी को पत्र लिखा है। जिसमें बताया कि वह खुद 14 साल तक विहिप के जिलाध्यक्ष रहे। उस वक्त विचारधारा के विपरीत की सरकारें थी। उस वक्त भी किसी प्रचारक संगठन मंत्री आदि को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। ये कहा कि जिस तरह से प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी की गई है। यह निंदनीय है। इस कार्रवाई को वापस लेने की मांग की गई है।ऐसा न होने पर विभिन्न सामाजिक संगठन भी इस प्रकरण में आगे आने को विवश होंगे।

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