Pilibhit :  विहिप संगठन मंत्री पर एफआईआर के बाद विवादों में घिरीं एडीएम वित्त को हटाया...शासन के एक्शन से खलबली 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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पीलीभीत, अमृत विचार। विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ पर सदर कोतवाली में एफआईआर और फिर गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद विवादों में घिरी एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया  पर आखिरकार शासन स्तर से गाज गिरा दी गई।  विहिप के तमाम नेताओं की आवाजाही और शासन स्तर तक की गई शिकायतों के बाद उनका हटना तय माना जा रहा था।

दिनभर चले कयासों के बाद बुधवार शाम को ऐसा ही हुआ। एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया को पीलीभीत से हटा दिया गया है। बताते हैं कि उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है। अब पीलीभीत के नए एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रसून द्विवेदी होंगे। वह इससे पहले मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण में विशेष  कार्याधिकारी थे। एडीएम के तबादले के बाद जिलेभर में मामला चर्चा का विषय बना रहा।

बता दें कि छह नवंबर को सदर कोतवाली में एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया की ओर से दी गई तहरीर पर विश्व हिंदू परिषद के शाजीपुर प्रभाग के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद प्रिंस गौड़ की पुलिस ने गिरफ़्तारी की और आनन-फानन में जेल भेज दिया था। इस कार्रवाई की भनक साथी नेताओं को भी नहीं लग सकी थी।

इसी के साथ विरोध भी शुरू हो गया था। जेल भेजे गए संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ की उसी दिन तबीयत बिगड़ी और मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। बताते हैं कि एक कॉलोनी के संबंध में एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया की शिकायत प्रिंस गौड़ ने कमिश्नर बरेली से की थी। 

प्रिंस गौड़ पर हुई कार्रवाई को इसी शिकायत से जोड़कर देखा जा रहा था। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री राजेश समेत कई वरिष्ठ नेता भी पीलीभीत पहुंचे थे और इस कार्रवाई को गलत करार दिया था। शासन स्तर पर भी शिकायतें की गई थी। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह और एसपी अभिषेक यादव से भी मुलाकात की गई थी।  इधर, पुलिस ने एडीएम की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में शामिल रंगदारी समेत अन्य संगीन आरोपों की धाराएं हटाई और न्यायालय से प्रिंस गौड़ को मंगलवार को जमानत भी मिल गई थी। 

करीब डेढ़ दशक तक विहिप के जिलाध्यक्ष रहे वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक अग्रवाल  ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके अलावा कुछ अन्य जनप्रतिनिधि व भाजपा नेता भी एडीएम की कार्यशैली से खफा थे।  उनके स्तर से भी शिकायतें शासन स्तर पर किए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था।  इसके बाद शासन स्तर से एडीएम पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी। बुधवार को भी इसे लेकर दिनभर कयास लगाए जाते रहे। देर शाम एडीएम के पीलीभीत से हटाकर प्रतीक्षारत किए जाने का आदेश सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया। जिसके बाद खलबली मच गई। अब एडीएम पर हुई कार्रवाई को इसी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

मंडी समिति में की गई छापामारी पर भी उठे थे सवाल
इन दिनों धान खरीद चल रही है। बीते दिनों एडीएम वित्त एवं राजस्व ने मंडी समिति पहुंचकर एक क्रय केंद्र का निरीक्षण किया और आढ़ती-क्रय केंद्र प्रभारी का गठजोड़ पकड़ने का दावा किया था। इस प्रकरण में उनके स्तर से कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मगर, ये निरीक्षण भी विवादों में फंसता दिखा था। किसी अन्य केंद्र को चेक न करना और सिर्फ एक आढ़ती को टारगेट करने पर सवाल उठाए गए। बताते हैं कि ये आढ़ती कोई और नहीं नगर पालिकाध्यक्ष  पीलीभीत डॉ.आस्था अग्रवाल के भाई थे।  ऐसे में इस निरीक्षण को लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं रही थी। इस प्रकरण को लेकर भी शासन स्तर पर शिकायतों का शोर मचा रहा था। विहिप के  विभाग संगठन मंत्री बरेली एवं प्रांत सह धर्म प्रचार प्रमुख देवेंद्र सोम ने एडीएम पर बरेली, बदायूं में भी पोस्टिंग के दौरान भ्रष्टाचार करने समेत कई आरोप लगाए थे। 

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