Pilibhit :  बाघ हमले में मरने वालों की संख्या हुई 60, अव्यवस्था और लापरवाही जिम्मेदार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद जनपद में हुए बाघ के हमलों में अब तक 59 लोग जान गंवा चुके थे। बुधवार को बराही जंगल में मिले किसान छोटेलाल का शव मिलने के बाद बाघ हमले में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 60 पर पहुंच गया। किसान छोटे लाल की बाघ हमले में हुई मौत पर ग्रामीण खासा आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इंसानों की सुरक्षा को लेकर जाल फैंसिंग की गई होती और ग्रामीणों द्वारा पिछले तीन से बाघ की मौजूदगी की सूचना पर वन विभाग ने गौर किया होता तो किसान छोटेलाल की जान बच सकती थी। फिलहाल इस घटना के बाद दो बच्चों के सिर से पहले मां और अब पिता का साया भी छिन गया।

बुधवार को पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव टांडा छत्रपति निवासी किसान छोटे की बाघ हमले में मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक किसान छोटे लाल का खेत बराही जंगल से सटा हुआ है। इसी खेत में फसलें पैदा कर छोटे लाल अपने परिवार को भरण पोषण करते आ रहे थे। बताते हैं कि छोटे लाल बीते मंगलवार को साइकिल से अपने खेत पर गए थे। शाम तक जब वे घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों को चिंता हुई। परिवार वालों ने खेत पर जाकर देखा तो खेत के पास ही उनकी साइकिल तो खड़ी मिल गई। मगर, किसान को कहीं अता-पता नहीं चल सका। परिजनों ने आसपास तलाश की और अंधेरा होने के चलते वापस लौट गए।

परिजनों ने गांव वालों को भी छोटेलाल के घर वापस न लौटने की बात बताई। तमाम तरह की आशंकाओं के बीच बुधवार सुबह होते ही तमाम ग्रामीण किसान की तलाश में खेत पर पहुंचे। सुबह करीब आठ बजे के आसपास जंगल के करीब 100 मीटर अंदर झाड़ी में किसान का एक पैर और उससे कुछ ही दूरी पर उसका अधखाया शव मिला। किसान का शव मिलने की जानकारी लगते हुए गांव समेत आसपास गांवों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। पुलिस और वनकर्मी भी मौके पर पहुंचे। किसान के शव को झाड़ियों से निकालकर बाहर लाया गया। 

ग्रामीणों में खासा आक्रोश देखा गया। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि इन दिनों जंगल के किनारे खेतों में किसान रखवाली कर रहे हैं। जंगल से निकले बाघ ने किसान को मारा है। यदि ऐसे ही चलता रहा तो कोई और किसान भी बाघ हमले का शिकार हो जाएगा। कुछ ग्रामीणों का कहना था कि यदि किसानों की सुरक्षा को जाल फैंसिंग कराई जाती और ग्रामीणों द्वारा लगातार तीन दिन से बाघ की मौजूदगी वाली बात पर वन विभाग ने गौर किया होता तो शायद आज किसान छोटे लाल की मौत नहीं हुई होती। फिलहाल जनप्रतिनिधियों और अफसरों के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए। तब कहीं पौन घंटे बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा।


तीन दिन से बाघ की थी चहलकदमी, वनकर्मियों ने नहीं दिया ध्यान
ग्रामीणों के मुताबिक जंगल से करीब तीन किमी दूरी पर बसे गांव पताबोझी समेत आसपास के गांवों में बाघ की चहलकदमी होती रहती है। पिछले तीन दिन से एक बाघ घटनास्थल के आसपास चहलकदमी देखी जा रही थी। बताते हैं कि घटनास्थल के पास ही कुछ दूरी बराही रेंज की भुड्डा वन चौकी है। आरोप है कि जब किसान की बाघ हमले में मौत का शोर उठा तो वन चौकी के वनकर्मी घटनास्थल पर जाने के बजाए खिसक लिए।

पहले मां और अब पिता का छिना साया
किसान छोटे लाल जंगल किनारे खेत में फसलें पैदा कर अपनी परिवार का भरण पोषण करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक छोटे लाल की पत्नी की पूर्व में ही मौत हो चुकी है। मां की मौत के बाद छोटे लाल ही अपनी 14 वर्षीय पुत्री पुष्पा और 10 वर्षीय पुत्र आकाश का पालन पोषण करते थे। इधर छोटे लाल की मौत के बाद अब उनके दोनों बच्चों के सिर से पिता का भी साया छिन गया। पूरी रात जाग कर पिता का इंतजार करने वाली पुष्पा को रोता देख हर किसी की आंख नम होती दिखी।

 

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज