आतंकी संगठनों का करीबी बता दो बुजुर्गों को किया डिजिटल अरेस्ट... देश विरोधी गतिविधियों के नाम पर 30.57 लाख की ठगी
साइबर क्राइम थाने में दोनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई, पुलिस तकनीकी जांच कर रही
लखनऊ, अमृत विचार: एटीएस अधिकारी बनकर जालसाजों ने 80 और 81 वर्ष के दो बुजुर्गों को आतंकवादी संगठन से जुड़ा बताकर फर्जी जांच के नाम पर फंसा लिया। आरोपियों ने दोनों पर पाकिस्तान से कनेक्शन होने का आरोप लगाते हुए उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया और धीरे-धीरे कर कुल 30.57 लाख रुपये ठग लिए। दोनों घटनाएं आलमबाग और राजाजीपुरम में हुईं। पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में एक ही गिरोह की भूमिका सामने आ रही है और आईपी एड्रेस के आधार पर जांच की जा रही है।
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना बृजेश कुमार यादव ने बताया कि आलमबाग निवासी 81 वर्षीय तेज बहादुर सिंह को जालसाजों ने चार दिन डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 18 लाख रुपये अपने बताए खातों में ट्रांसफर करा लिए। वहीं राजाजीपुरम के 80 वर्षीय गया प्रसाद त्रिपाठी को सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उनसे 12.57 लाख रुपये विभिन्न खातों में जमा करा लिए गए। दोनों बुजुर्गों को लगातार धमकाया गया कि उनके खातों से देश विरोधी गतिविधियों के लिए करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
एचडीएफसी खाते से आतंकी लेनदेन का दावा
तेज बहादुर के अनुसार 9 नवंबर को दो अलग-अलग नंबरों से कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को सूचना अधिकारी और स्पेशल टास्क फोर्स का अधिकारी बताया। कहा कि उनके आधार कार्ड पर एचडीएफसी बैंक में खाता खोला गया है, जिसका उपयोग पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन रुपये के लेनदेन के लिए कर रहे हैं। दावा किया गया कि जम्मू-कश्मीर में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। जालसाजों ने महाराष्ट्र एटीएस का लोगो दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश की और अगले दिन मुंबई एटीएस दफ्तर में बयान देने को कहा।
बुजुर्ग होने का हवाला देने पर फोन पर बयान और जमानत राशि जमा करने का विकल्प दिया गया। तेज बहादुर ने 11 नवंबर को पत्नी के खाते से 14 लाख और 12 नवंबर को चार लाख रुपये मुरादाबाद निवासी शुभम गुप्ता के खाते में जमा कराए। चार दिन तक फोन बंद न करने और किसी से संपर्क न करने की धमकी देकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। रकम भेजने के बाद जालसाजों ने आरबीआई और भारत सरकार के नाम पर फर्जी बॉन्ड भेजकर उन्हें शांत रखने की कोशिश की, लेकिन बैंक कर्मचारियों की पूछताछ पर ठगी का खुलासा हुआ।
सात दिन तक डराकर 12.57 लाख वसूले
गया प्रसाद त्रिपाठी को 7 नवंबर को कॉल कर खुद को एटीएस अधिकारी रंजीत कुमार बताया गया। आरोपियों ने कहा कि उनका नंबर पाकिस्तानी नेटवर्क के पास है और दिल्ली के संदिग्ध अफजल खान ने उनकी जानकारी पुलिस को दी है। इस आधार पर जम्मू-कश्मीर में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने का दावा किया गया। गिरफ्तारी का भय दिखाकर कहा गया कि उन्हें बचाने के लिए एनओसी दिलाई जा सकती है, जिसके लिए बैंक खातों की जांच जरूरी है।
डर में आकर उन्होंने अपने तीनों बैंक खातों की जानकारी दे दी। 7 से 13 नवंबर के बीच उन्होंने कुल 12.57 लाख रुपये जालसाजों द्वारा बताए खातों में जमा करा दिए।
