UP: 60 फीसद सरकारी कार्यालयों में गठित नहीं शिकायत समिति...किसे दुखड़ा सुनाएं महिला कर्मचारी ?
बदायूं, अमृत विचार। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ कोई घटना घटित होती है, इसके लिए भी अधिनियम लागू किया गया है। महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करने के निर्देश शासन की ओर से सभी सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों को दिए गए हैं।
लेकिन जिले में स्थिति गंभीर है। करीब 60 फीसद कार्यालय ऐसे जहां पर महिलाओं की सुनवाई करने के लिए समिति का गठन अब तक नहीं हो सका है। इसमें सरकारी विभाग भी शामिल हैं। समिति का गठन न होने की वजह से इन ऑफिसों में महिलाओं की सुनवाई नहीं हो पाती है। न्याय पाने के लिए उन्हें इधर उधर भटकना पड़ता है।
महिलाओं के यौन उत्पीड़न के लिए साल 2013 में अधिनियम लागू किया था। इससे सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं को रोका जा सके। इस अधिनियम के तहत किसी भी सरकारी गैर सरकारी कार्यालय में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं उनमें लैंगिक उत्पीड़न संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए विशेष समिति गठित होनी आवश्यक है। जिससे कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा मिल सके।
इसके बाद भी जिले के सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों में महिला यौन उत्पीड़न समिति का गठन नहीं हो सका है। इस अधिनियम को अमलीजामा पहनाने में सरकारी महकमों के साथ निजी प्रतिष्ठान राजी तक नहीं हैं। प्रोबेशन विभाग के अधिकारियों की मानें तो निजी प्रतिष्ठानों में समिति का अब तक गठन नहीं हो सका। ऐसा ही हाल सरकारी कार्यालयों का है। अभी 10 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों में समिति का गठन नहीं हो सका है। प्रोबेशन विभाग की ओर से निजी प्रतिष्ठानों में जल्द ही समिति गठन किए जाने की कवायद शुरू करने की बात कही जा रही है।
कमेटी में महिला कर्मचारी का होना अनिवार्य
महिला यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 में वर्णित है कि सभी सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों में महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए समिति गठित होनी चाहिए। इस समिति में कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारी को शामिल किया जाना अनिवार्य किया गया है। अगर किसी समिति सिर्फ पुरुष ही शामिल हैं, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा।
कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए हैं कई प्रावधान
प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति अभियान चला रही है। उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा क लिए शिकायत समिति गठित होने के साथ अन्य प्रावधान किए गए हैं। कार्यस्थल पर सीसीटीवी, एक्सेस कंट्रोल सिस्टम आदि सुरक्षा उपाय करने को भी कहा गया है। साथ ही सभी कर्मियों के पहचान पत्र जुटाने तथा आपात स्थिति में संपर्क के लिए चौबीस घंटे एक अधिकारी नामित करने के भी निर्देश हैं। महिलाओं के लिए कार्यस्थल के पास अलग और सुरक्षित रेस्ट रूम और प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था रखने के लिए भी निर्देश हैं लेकिन कई सरकारी दफ्तरों में अभी तक इसका इंतजाम नहीं है।
यह है महिला यौन उत्पीड़न अधिनियम
महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने साल 2013 अधिनियम लागू किया है। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के तहत शारीरिक संपर्क और यौन संपर्क के लिए मांग अथवा अनुरोध, लैंगिक रूप से भद्दी टिप्पणी, अश्लील साहित्य दिखाना, अन्य अवांछनीय शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण नहीं किया जा सकता। अगर किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ कोई घटना घटित होती है तो वह अपनी शिकायत को आंतरिक शिकायत समिति से कर सकती है।
लगभग सभी सरकारी कार्यालयों में महिलाओं की शिकायत के लिए समिति गठित करा दी गई है। एक दो विभाग ही शेष बचे हैं, लेकिन अभी गैर सरकारी कार्यालय वंचित हैं। इनमें अभी तक समितियां गठित नहीं हो सकी हैं। जल्द ही गैर सरकारी कार्यालय चिन्हित कर उनमें समितियों का गठन कराया जाएगा। - अभय कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी
